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विदेश मंत्री जयशंकर की चीन को दो टूक, रिश्ते सामान्य करने को लेकर क्या बोले?

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से दो टूक शब्दों में कहा कि बॉर्डर पर शांति और स्थिरता ही दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्तों की पहली और सबसे जरूरी शर्त है.

विदेश मंत्री जयशंकर की चीन को दो टूक, रिश्ते सामान्य करने को लेकर क्या बोले?
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर
PTI
  • विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की.
  • इस दौरान उन्होंने सीमा विवाद, व्यापार, सप्लाई चेन जैसे कई अहम मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया.
  • बीते करीब 2 सालों में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें, कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीमा व्यापार फिर शुरू हुए हैं.

भारत और चीन के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जब तक सीमा पर पूरी तरह शांति और स्थिरता नहीं होगी, तब तक दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं माने जा सकते. विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बुधवार को फिलीपींस की राजधानी मनीला में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठकों के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सीमा विवाद, व्यापार, सप्लाई चेन और दोनों देशों के बीच सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया.

बैठक की शुरुआत में ही डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच एक स्थिर और सहयोगात्मक संबंध तभी बन सकता है, जब वह आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता पर आधारित हो. उन्होंने कहा कि ऐसा रिश्ता सिर्फ दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय दुनिया के लिए भी अहम होगा.

सीमा पर शांति सबसे पहली शर्त

जयशंकर ने सबसे अहम बात सीमा पर शांति को लेकर कही. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन के सामान्य संबंधों की पहली और सबसे जरूरी शर्त है. विदेश मंत्री ने कहा कि अक्टूबर 2024 से दोनों देशों ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं और सीमा पर हालात को बेहतर बनाने की कोशिश जारी है. बता दें कि अक्तूबर 2024 से अब तक दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार की फिर से शुरुआत और वीजा व्यापार में संशोधन जैसे आपसी सहयोग के क्षेत्रों पर काम किया गया है. विदेश मंत्री ने इन सब का  हालांकि इस प्रक्रिया को लगातार ध्यान देने और दोनों देशों के बीच बने सैन्य तथा राजनयिक तंत्र को मजबूत समर्थन देने की जरूरत होगी.

मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए

विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बनी उस सहमति को भी दोहराया, जिसमें कहा गया था कि दोनों देशों के मतभेद विवाद का रूप नहीं लेने चाहिए. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन दोनों बड़े देश हैं और पड़ोसी भी हैं. ऐसे में दोनों के अपने-अपने हित और प्राथमिकताएं होना स्वाभाविक है. लेकिन इन मतभेदों को संभालना और उन्हें टकराव में बदलने से रोकना कूटनीति की जिम्मेदारी है.

व्यापार और सप्लाई चेन पर भी जताई चिंता

सीमा के अलावा भारत ने आर्थिक मुद्दों पर भी चीन के सामने अपनी चिंताएं रखीं. विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय कंपनियों को चीन में निष्पक्ष बाजार पहुंच मिलनी चाहिए. उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इसे दूर करने की जरूरत है. उन्होंने सप्लाई चेन की विश्वसनीयता और पूर्वानुमान को लेकर भी चिंता जताई. भारत का मानना है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के दौर में सप्लाई चेन भरोसेमंद और स्थिर होनी चाहिए. विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच सिर्फ सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि लोगों के बीच संपर्क भी बढ़ना चाहिए. उन्होंने विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों और संवाद मंचों की नियमित बैठकें आयोजित करने पर भी जोर दिया.

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ
Photo Credit: MEA

हाल के महीनों में बढ़ी है बातचीत

भारत और चीन ने पिछले कुछ महीनों में रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं. इनमें दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया, वीजा व्यवस्था में बदलाव, कैलाश मानसरोवर यात्रा की दोबारा शुरुआत और सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने जैसे फैसले शामिल हैं. भारत का मानना है कि ये विश्वास बहाली के महत्वपूर्ण कदम हैं.

लद्दाख समझौते के बाद बदले हालात

पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी पर सहमति बनाई थी. ये दोनों आखिरी बड़े विवाद वाले क्षेत्र थे. इसके बाद रूस के कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, जहां दोनों नेताओं ने रिश्तों को सुधारने के लिए कई फैसले लिए. बाद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं ने बातचीत कर संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई.

मनीला में हुई इस बैठक से भारत ने चीन को एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि बातचीत और सहयोग के लिए भारत तैयार है, लेकिन सीमा पर शांति और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिरता से कोई समझौता नहीं होगा. साथ ही भारत चाहता है कि चीन व्यापार, बाजार पहुंच और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर भी ठोस कदम उठाए, ताकि दोनों देशों के रिश्ते संतुलित और टिकाऊ आधार पर आगे बढ़ सकें.

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