- भारत में इस साल मॉनसून बारिश सामान्य से करीब 13 फीसद पीछे चल रही है.
- अगस्त के मध्य में उत्तर-पश्चिम भारत में सूखी हवाओं के असर से बारिश की गतिविधि कमजोर पड़ने के संकेत मिले हैं.
- अगर बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम बने और जमीन की ओर बढ़ कर बरसे, तो बारिश की मौजूदा कमी कुछ कम हो सकती है.
भारत में 4 जून से अब तक मॉनसून में हुई कुल बारिश सामान्य से करीब 13 फीसद कम बताई जा रही है. यानी सीजन के इस पड़ाव पर देश को सामान्य बारिश के मुकाबले एक बड़ा अंतर झेलना पड़ रहा है. हालांकि तस्वीर पूरे देश में एक जैसी नहीं है. पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य के आसपास रही है, जबकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, पूर्वोत्तर और दक्षिणी प्रायद्वीपीय हिस्सों के कई क्षेत्रों में कमी बनी हुई है. देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का सीजन अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अगस्त के मध्य में मौसम का मिजाज बदलने के संकेत जरूर दिखने लगे हैं. उत्तर-पश्चिम भारत की तरफ सूखी हवाओं का असर बढ़ रहा है और कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ती दिख रही हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मॉनसून इस बार बारिश की कमी को पूरा करने का आखिरी मौका खो रहा है?

Photo Credit: Abhijit Shrivastava
क्या सच में मॉनसून की विदाई शुरू हो गई है?
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है. मौसम में मॉनसून कमजोर पड़ने या वापसी जैसे संकेत दिखना और मॉनसून की आधिकारिक विदाई घोषित होना दो अलग बातें हैं.
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत के सबसे पश्चिमी हिस्सों से मॉनसून की वापसी 1 सितंबर से पहले शुरू करने पर विचार नहीं किया जाता. आधिकारिक वापसी के लिए किसी इलाके में लगातार पांच दिन तक बारिश की गतिविधि का खत्म होना और निचले वायुमंडल में एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन जैसे मौसम संबंधी संकेत देखे जाते हैं. इसलिए अगस्त में सूखी हवाओं का पहुंचना फिलहाल मॉनसून के कमजोर चरण का संकेत माना जा सकता है. हालांकि इसे देश से मॉनसून की औपचारिक विदाई का संकेत फिलहाल नहीं माना जा सकता.

सूखी हवाएं क्यों हैं महत्वपूर्ण?
मॉनसून के दौरान बारिश के लिए वातावरण में पर्याप्त नमी और अनुकूल मौसम प्रणालियों की जरूरत होती है. जब उत्तर-पश्चिम से अपेक्षाकृत सूखी हवा का प्रभाव बढ़ता है, तो वातावरण में नमी घट सकती है. इसका असर बादलों के बनने और बारिश की गतिविधियों पर पड़ता है.
यही वजह है कि उत्तर-पश्चिम भारत में सूखी हवाओं की एंट्री को मौसम विशेषज्ञ मॉनसून की सक्रियता में संभावित कमी के संकेत के तौर पर देखते हैं.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बारिश तुरंत खत्म हो जाएगी. मॉनसून की गतिविधि अब भी कम दबाव वाले क्षेत्रों, डिप्रेशन और बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियों से दोबारा तेज हो सकती है. मौसम विभाग अपने डेली बुलेटिन में बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन की वजह से ओडिशा, बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में बारिश का लगातार अलर्ट जारी कर रही है. हालांकि अब तक हुई कुल बारिश सामान्य से करीब 13 फीसद कम भी बताई गई है.
13 फीसद बारिश की कमी क्यों चिंता की बात है?
मॉनसून भारत की अर्थव्यवस्था और खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. देश की बड़ी आबादी और कृषि क्षेत्र अब भी बारिश पर काफी निर्भर है. अगर सीजन के आखिरी हिस्से में बारिश की कमी बनी रहती है, तो इसका समग्र असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरह से दिखाई दे सकता है.
सबसे पहले खेती प्रभावित हो सकती है. खरीफ फसलों के लिए अगस्त और सितंबर की बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है. जिन क्षेत्रों में बुवाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होती, वहां मिट्टी की नमी कम हो सकती है और फसलों पर दबाव बढ़ सकता है.
दूसरा असर जल संसाधनों पर पड़ सकता है. बारिश कम होने का मतलब जलाशयों, नदियों और भूजल रिचार्ज पर भी दबाव हो सकता है.
तीसरा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि कृषि उत्पादन में कमी का असर किसानों की आय और ग्रामीण मांग पर भी पड़ सकता है.

क्या अब बारिश की कमी पूरी नहीं हो पाएगी?
मॉनसून सीजन सितंबर के अंत तक चलता है और अगस्त के दूसरे हिस्से और सितंबर में बनने वाली मौसम प्रणालियां कई इलाकों में बारिश को तेजी से बढ़ा सकती हैं.
बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र और डिप्रेशन मॉनसून की गतिविधि को फिर से सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हाल के दिनों में भी बंगाल की खाड़ी और उससे जुड़े क्षेत्रों में ऐसी प्रणालियां बनी हैं. मौसम विभाग के 17 अगस्त की बुलेटिन में भी उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट के ऊपर बनी डीप डिप्रेशन का जिक्र किया गया था.
इसका मतलब है कि मॉनसून के पास अभी भी बारिश की कमी को कुछ हद तक कम करने का मौका है. ऐसे में यह कह पाना जल्दबाजी होगी कि बारिश की कमी पूरी नहीं हो पाएगी.

फिर सबसे बड़ा खतरा क्या है?
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर आने वाले हफ्तों में बारिश के बड़े सिस्टम पर्याप्त संख्या में नहीं बनते हैं, तो 13 फीसद की कमी को पाटना मुश्किल हो सकता है.
इस साल की शुरुआत में मौसम विभाग ने 2026 के पूरे मॉनसून सीजन के लिए देश में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई थी. मई के अपडेट में पूरे देश के लिए सीजनल बारिश को लॉन्ग पीरियड एवरेज के करीब 90 फीसद रहने का अनुमान दिया गया था.
इसलिए मौजूदा 13 फीसद की कमी को केवल एक छोटे मॉनसून ब्रेक के रूप में देखना भी सही नहीं होगा. हालांकि अंतिम तस्वीर सितंबर के अंत में ही साफ होगी.

Photo Credit: Abhijit Shrivastava
किन इलाकों पर ज्यादा नजर रहेगी?
बारिश की कमी पूरे देश में समान नहीं है. पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में सीजन के दौरान अच्छी बारिश के दौर आए हैं. दूसरी तरफ उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों, पूर्वोत्तर और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों में कमी ज्यादा चिंता का विषय बनी हुई है.
इसका मतलब है कि देश का औसत आंकड़ा अकेले पूरी तस्वीर नहीं बताता. किसी राज्य में सामान्य बारिश हो सकती है, जबकि उसके पड़ोसी राज्य या उसी राज्य का कोई इलाका बड़े घाटे में हो सकता है.
यही वजह है कि आगे की निगरानी राज्य और क्षेत्रवार बारिश के आंकड़ों पर करनी होगी.

क्या सितंबर में मॉनसून फिर सक्रिय हो सकता है?
मॉनसून की वापसी आम तौर पर धीरे-धीरे होती है और आधिकारिक वापसी शुरू होने के बाद भी देश के कई हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है. इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया मौसम चक्र मॉनसून की गतिविधि को कुछ समय के लिए फिर मजबूत कर सकता है. इसलिए अगस्त के मध्य में बारिश का कमजोर होना यह साबित नहीं करता कि पूरे देश में मॉनसून का अंत हो गया है.
उत्तर-पश्चिम भारत में सूखी हवाओं और कमजोर बारिश के संकेत जरूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग के मानकों के हिसाब से मॉनसून की आधिकारिक वापसी अभी शुरू नहीं हुई है. ऐसे में बारिश में 13 फीसद की कमी के बीच अगस्त में कुल बारिश कितनी होती है यह बेहद अहम हो गया है. अगर बंगाल की खाड़ी नए मौसम चक्र बनाते हैं और वे मध्य, उत्तर और दक्षिण भारत में बारिश की कमी वाले इलाकों तक पहुंचते हैं तो ये आंकड़े कुछ सुधर सकते हैं. लेकिन अगर सूखी हवाएं लंबे समय तक बारिश में ब्रेक लगाती हैं तो सीजन के अंत में बारिश की कमी बनी रह सकती है.
फिलहाल स्थिति यह है कि अभी कुल बारिश में 13 फीसद की कमी है और सवाल ये कि क्या बचे हुए अगस्त के साथ ही पूरे सितंबर में इतनी बारिश होगी कि वो इस मौजूदा अंतर को कम कर सकेगी?
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