देश के कई राज्यों में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है. लेकिन आने वाले दिनों में भीषण गर्मी कई राज्यों में तबाही मचाएगी. भारत मौसम विभाग समेत दुनिया की कई मौसम एजेंसियों ने अल नीलो को लेकर भविष्यवाणी की है. अल नीनो को लेकर खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने चेतावनी दी है कि यह भारत के ग्रीष्मकालीन मॉनसून को कमजोर कर सकता है, जिससे महत्वपूर्ण खरीफ सत्र के दौरान चावल और मक्का समेत फसलें दबाव में आ सकती हैं. वहीं अल नीनो के खतरे को देखते हुए, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कम बारिश वाले जिलों में पहले से आपातकालीन योजना बनाने की जरूरत पर जोर दिया. साथ ही उन्होंने कपास और दालों की खेती का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया.
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश
न्यूज एजेंसी IANS के अनुसार, कृषि भवन में सीनियर अधिकारियों के साथ हुई एक हाई लेवल कृषि समीक्षा बैठक में, खरीफ 2026 के लिए देश भर में की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक के दौरान, अल नीनो की संभावित स्थिति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे उन जिलों में पूरी तैयारी सुनिश्चित करें जहां कम बारिश या बारिश के असमान वितरण की संभावना है.
मंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "वैज्ञानिक तरीकों, सही किस्मों के चयन, इंटरक्रॉपिंग, मल्चिंग और नमी संरक्षण जैसे उपायों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, ताकि कपास की उत्पादकता और किसानों की आय दोनों बढ़ सकें."
सरकार कर रही है अल नीनो की तैयारी
सरकार पहले से ही अल नीनो की वजह से कमजोर मॉनसून की तैयारी कर रही है. जलाशय के ऊंचे जलस्तर, अनाज के रिकॉर्ड स्टॉक और अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक सुधारों के कारण, भारत इस साल संभावित कमजोर मॉनसून और उभरती अल नीनो स्थितियों का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में जलाशय में पानी का स्तर उसकी कुल क्षमता का 30.4 प्रतिशत था. यह 2015-16 और 2023-24 के बीच अल नीनो वाले पिछले सालों में दर्ज किए गए 25.1 प्रतिशत के औसत स्तर से ज्यादा है.
यह भी पढ़ें: मॉनसून की क्यों धीमी हुई रफ्तार, यूपी-दिल्ली कब पहुंचेगी बारिश? मौसम वैज्ञानिक ने NDTV को बताई वजह
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं