देश भर में मॉनसून की धीमी गति ने सरकार को चौकन्ना कर दिया है. सूत्रों के अनुसार कल कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबंधित मंत्रालयों को इस बारे में सतर्क रहने और आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है. इसके बाद कई मंत्रालय तैयारियों में जुट गए हैं. मौसम विभाग के अनुसार पिछले 12 वर्षों में जून में सबसे कम बारिश हुई है और जुलाई में भी औसत से कम बारिश की संभावना व्यक्त की गई है. अभी तक औसत से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है जिसका असर फसलों पर पड़ने की आशंका है.
अल नीनो के कारण मॉनसून पर असर
सूत्रों के अनुसार सरकार का आकलन है कि अन नीनो के कारण इस बार मॉनसून प्रभावित हो रहा है. इस कारण कई जगहों पर कम बारिश तो कुछ जगहों पर अधिक बारिश हो सकती है. इन दोनों ही परिस्थितियों को लेकर तैयारी करने की जरूरत है. उन दस मंत्रालयों और विभागों को इसकी तैयारी करने को कहा गया है जो मॉनसून की प्रगति से सीधे जुड़े हैं. इनमें कृषि, खाद्य, ग्रामीण विकास और पंचायती राज, ऊर्जा, जलशक्ति, पशुपालन, डेयरी, गृह और वित्त मंत्रालय आदि शामिल हैं. ये मंत्रालय आपस में भी तालमेल रखेंगे ताकि जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे को सहयोग कर सकें.
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12 राज्यों पर खास नजर
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कह चुके हैं कि 315 जिले ऐसे हैं जहां कमजोर मॉनसून के कारण चुनौतियां आ सकती हैं. इनमें 111 जिलों की पहचान की गई है जहां सिंचाई की उपलब्धता 25 प्रतिशत से कम है. चौहान के अनुसार इन जिलों को उच्च प्राथमिकता में रखा गया है. इनमें अधिकांश जिले 12 राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में हैं.
वीबी जी राम जी का बजट बढ़ सकता है
इसके अलावा सरकार विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी जी राम जी का बजट बढ़ाने पर भी विचार कर रही है. एक जुलाई से देश भर में लागू हुए इस कानून में मौजूदा वित्तीय वर्ष में करीब 95,692 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है. इसके तहत 300 रुपए से लेकर 409 रुपए तक की मजदूरी तय की गई है. सिक्किम की कुछ पंचायतों में 450 रुपए की विशेष दर भी है. हरियाणा में सबसे अधिक 409 रुपए की दर है जबकि 21 राज्यों में 300 रुपए की दर तय की गई है. सूत्रों के अनुसार मॉनसून कमजोर रहने की स्थिति में सूखा प्रभावित क्षेत्रों में अधिक लोगों को रोजगार देना होगा. ऐसे में इस कानून के लिए आवंटित धनराशि में बढोतरी करने का भी प्रस्ताव रखा गया है जिस पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है. मनरेगा की जगह आए इस कानून में ग्रामीण क्षेत्रों में सौ के बजाए 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है.
जलाशयों पर भी सरकार की नजर
साथ ही, जलाशयों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. जल ऊर्जा संयंत्रों में पानी की कमी से बिजली उत्पादन पर पड़ने वाले असर का आकलन भी किया जा रहा है ताकि दूसरे स्रोतों से बिजली उत्पादन के रास्ते तलाशे जाएं और बिजली संकट न हो. पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा गया है. खाद्य भंडारों का जायजा भी लिया जा रहा है.
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