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हिट एंड रन में हर 10 मिनट में जाती है 1 जान, मगर सजा से बच जाते हैं आधे गुनहगार; क्या साहिल को मिलेगा इंसाफ?

दिल्ली के द्वारका में 23 साल के साहिल धनेश्रा की मौत एक सड़क हादसे में हो गई. जिस गाड़ी ने उसे कुचला, उसे एक नाबालिग चला रहा था. आंकड़े बताते हैं कि देश में हर साल हिट एंड रन के 50 हजार मामले सामने आते हैं.

हिट एंड रन में हर 10 मिनट में जाती है 1 जान, मगर सजा से बच जाते हैं आधे गुनहगार; क्या साहिल को मिलेगा इंसाफ?
  • द्वारका में एक स्कॉर्पियो से साहिल धनेश्रा की टक्कर से हुई मौत ने हिट एंड रन केस को सुर्खियों में ला दिया है
  • NCRB के अनुसार 2019 से 2023 तक हिट एंड रन के 2.31 लाख से अधिक मामले और लगभग 2.50 लाख मौतें दर्ज हुई हैं
  • 2023 में देशभर में हिट एंड रन के लगभग 51 हजार मामले सामने आए, जिनमें 55 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई थी
नई दिल्ली:

दिल्ली के द्वारका का 'हिट एंड रन' केस चर्चा में बना हुआ है. 3 फरवरी को एक स्कॉर्पियो ने सामने से बाइक से आ रहे साहिल धनेश्रा को टक्कर मार दी थी, जिसमें उनकी मौत हो गई. साहिल धनेश्रा घर से ऑफिस के लिए निकले थे. उनकी मां इन्ना माकन ने बताया कि ऑफिस से 200 मीटर दूरी पर ही ये दुर्घटना हो गई. जिस स्कॉर्पियो ने साहिल को टक्कर मारी, उसे एक नाबालिग चला रहा था. वह अपनी बहन के साथ रील बनाने के लिए निकला था. 

बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो की रफ्तार काफी ज्यादा थी. साहिल अपनी बाइक से सामने से आ रहे थे और दोनों में टक्कर हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए. साहिल का शव भी बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया. साहिल को टक्कर मारने के बाद स्कॉर्पियो रुकी नहीं, बल्कि उसने आगे जाकर एक टैक्सी को भी टक्कर मार दी. 

इस मामले में पुलिस ने नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार किया था. उसे बाल सुधार गृह भेजा गया. लेकिन बोर्ड एग्जाम के कारण उसे जमानत भी मिल गई.

लेकिन हिट एंड रन के केस में जान गंवाने वाले साहिल धनेश्रा अकेले नहीं हैं. हर दिन साहिल जैसे 150 लोग हिट एंड रन के केस में अपनी जान गंवाते हैं. अकेले राजधानी दिल्ली में ही हर दिन हिट एंड रन में दो लोगों की मौत हो जाती है. लेकिन सवाल ये है कि हिट एंड रन के केस में आखिर अदालतों में होता क्या है? कितने मामलों में आरोपियों को सजा मिलती है?

कितने हिट एंड रन केस?

ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जिस दिन हिट एंड रन का कोई मामला सामने न आए. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पर 2023 तक के आंकड़े मौजूद हैं. NCRB की रिपोर्ट बताती है कि साल दर साल हिट एंड रन के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. 

2019 से 2023 तक के 5 साल का डेटा देखें तो 2020 को छोड़कर हर साल हिट एंड रन के मामले और इनमें होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ा ही है. 2020 में भी मामलों में कमी इसलिए रही, क्योंकि ये कोविड का साल था और कई महीने लॉकडाउन में रहे थे. 

NCRB के आंकड़े बताते हैं कि 2019 से 2023 के बीच हिट एंड रन के 2.31 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे, जिनमें लगभग 2.50 लाख मौतें हुई थीं. अकेले 2023 में ही हिट एंड रन के 51,780 मामलों में 55,334 लोगों की जान गई थी. इस हिसाब से 2023 में हर दिन हिट एंड रन में औसतन 151 मौतें हुईं. यानी, हर घंटे 6 और हर 10 मिनट में 1 व्यक्ति की जान गई.

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अब अगर जरा बात करें सबसे खतरनाक शहर की तो इसमें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है. लखनऊ में हिट एंड रन के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं. राजधानी दिल्ली दूसरे नंबर पर है.

NCRB अपनी रिपोर्ट में 19 बड़े शहरों में क्राइम का डेटा भी देती है. इसके मुताबिक, लखनऊ में 2023 में हिट एंड रन के 993 मामले सामने आए थे, जिनमें 1,025 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं, राजधानी दिल्ली में हिट एंड रन के 695 मामलों में 792 मौतें हुई थीं. इसका मतलब हुई कि लखनऊ में हिट एंड रन से हर दिन औसतन 3 और दिल्ली में 2 मौतें हो जाती हैं.

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लेकिन सजा कितनों को?

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश भर में हर साल हिट एंड रन के औसतन 45-50 हजार मामले सामने आते हैं. इनमें 50 हजार से ज्यादा मौतें होती हैं. लेकिन सवाल उठता है कि ऐसे मामलों में सजा कितनों को होती है?

NCRB की ही रिपोर्ट बताती है कि हिट एंड रन के मामलों में औसतन कन्विक्शन रेट 52% है. इसका मतलब हुआ हिट एंड रन के आधे मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं.

NCRB का डेटा बताता है कि 2023 में हिट एंड रन के 20,548 मामलों में ट्रायल पूरा हो गया था. इनमें से 11,548 मामलों में ही आरोपी को सजा हुई थी. इस हिसाब से इन मामलों में कन्विक्शन रेट 56.2% था. ये तीन साल में सबसे ज्यादा था. इससे पहले हिट एंड रन के मामलों में कन्विक्शन रेट 2021 में 51.9% और 2022 में 47.9% था. NCRB की रिपोर्ट बताती है कि 2023 के आखिर तक देशभर की अदालतों में हिट एंड रन के 2.27 लाख मामेल पेंडिंग हैं.

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भारतीय कानून में हिट एंड रन के मामले और उनमें हुईं मौतें लापरवाही से हुई हत्या मानी जाती हैं. ऐसे मामलों में दो साल की सजा हो जाती है. हालांकि, ज्यादातर मामलों में जमानत भी मिल जाती है.

1 जुलाई 2024 को इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू की गई थी. इसमें धारा 106 (2) में हिट एंड रन के मामलों में 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है. हालांकि, विरोध के बाद इन प्रावधानों को अभी लागू नहीं किया गया है. 

लेखक के बारे में
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प्रियंक द्विवेदी
चीफ सब एडिटर
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