- डीआरडीओ ने आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में ULPGM-V3 मिसाइल का सफल परीक्षण किया जो ड्रोन से लॉन्च होती है
- ULPGM-V3 मिसाइल फायर एंड फॉरगेट तकनीक पर काम करती है और हवा तथा जमीन दोनों लक्ष्यों को निशाना बना सकती है
- यह मिसाइल दिन और रात दोनों समय लगभग चार से दस किलोमीटर दूरी पर दुश्मन को सटीक रूप से मार सकती है
भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी डीआरडीओ ने अपनी नई स्वदेशी मिसाइल ULPGM-V3 का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है. यह मिसाइल ड्रोन से लॉन्च होती है और दुश्मन के टैंक, बंकर, ड्रोन और हेलीकॉप्टर जैसे लक्ष्यों को सटीक तरीके से निशाना बना सकती है. इस मिसाइल का परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित टेस्ट रेंज में किया गया. खास बात यह रही कि इसका ट्रायल जमीन और हवा दोनों तरह के लक्ष्यों पर किया गया. डीआरडीओ के मुताबिक इस मिसाइल ने सभी परीक्षणों में शानदार प्रदर्शन किया.
क्या है इस मिसाइल की खासियत?
ULPGM का पूरा नाम 'अनमैन्ड एरियल व्हीकल लॉन्च्ड प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल' है. यह हल्की, स्मार्ट और बेहद सटीक मिसाइल है. इसे छोटे ड्रोन, बड़े यूएवी और अटैक हेलीकॉप्टर से भी लॉन्च किया जा सकता है. यह मिसाइल 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक पर काम करती है. यानी लॉन्च के बाद ऑपरेटर को इसे लगातार कंट्रोल करने की जरूरत नहीं होती. मिसाइल खुद अपने लक्ष्य को पहचानकर हमला करती है.
ULPGM-V3 की सबसे बड़ी खासियत इसकी एयर-टू-एयर क्षमता है. अब तक ऐसी हल्की मिसाइलें ज्यादातर जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल होती थीं. लेकिन अब यह मिसाइल हवा में उड़ रहे दुश्मन ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को भी मार सकती है.

रात में कई किमी दूर दुश्मन को बना सकती है निशाना
आधुनिक युद्ध में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इसे बड़ी रणनीतिक क्षमता माना जा रहा है. मिसाइल का वजन करीब 12.5 किलोग्राम है. इसकी रेंज दिन में लगभग 4 से 10 किलोमीटर तक बताई जा रही है. रात में भी यह कई किलोमीटर दूर मौजूद लक्ष्य को निशाना बना सकती है.
डीआरडीओ ने इसमें हाई-डेफिनिशन डुअल चैनल सीकर लगाया है. इसमें इमेजिंग इंफ्रारेड और RF तकनीक का इस्तेमाल हुआ है. इससे मिसाइल दिन और रात दोनों समय दुश्मन को पहचान सकती है. इस मिसाइल में टू-वे डेटा लिंक तकनीक भी दी गई है. यानी लॉन्च के बाद भी ऑपरेटर मिसाइल को नई जानकारी भेज सकता है. जरूरत पड़ने पर मिसाइल का टारगेट बदला भी जा सकता है. यह फीचर तेजी से बदलते युद्ध क्षेत्र में बेहद अहम माना जा रहा है.
दुश्मन के टैंक के कमजोर हिस्से को करती है टारगेट
ULPGM-V3 को इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के माहौल में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. अगर दुश्मन GPS या कम्युनिकेशन सिस्टम जाम करने की कोशिश करे, तब भी यह मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है. मिसाइल में अलग-अलग तरह के वारहेड लगाए जा सकते हैं. यह टैंक, बंकर और सैनिकों जैसे अलग-अलग लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है. इसका टॉप-अटैक मोड दुश्मन के टैंक के कमजोर ऊपरी हिस्से पर हमला करता है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया. वहीं डीआरडीओ के चेयरमैन समीर वी कामत ने इसे भारतीय रक्षा तकनीक की बड़ी उपलब्धि कहा. इस परियोजना में कई सरकारी और निजी कंपनियों ने मिलकर काम किया. भारत डायनामिक्स लिमिटेड , अदाणी डिफेंस सिस्टम एंड टेक्नोलॉजी लिमिटेड , न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी जैसी जैसी कंपनियां भी इसमें शामिल रहीं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन आधारित युद्ध तेजी से बढ़ेगा. ऐसे में ULPGM-V3 जैसी हल्की, सस्ती और सटीक मिसाइल भारतीय सेना की ताकत को नई बढ़त दे सकती है.
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