विज्ञापन

डोडा सड़क हादसा: 27 जनवरी को घर लौटना था, पर तिरंगे में लिपटकर आएगा 'शेरपुर' का लाल

सुधीर की शहादत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया. मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वे सुध-बुध खो बैठी हैं. अपने इकलौते बेटे को खोने के गम में डूबी मां हर आने-जाने वाले से बस एक ही गुहार लगा रही हैं.

डोडा सड़क हादसा: 27 जनवरी को घर लौटना था, पर तिरंगे में लिपटकर आएगा 'शेरपुर' का लाल
नई दिल्ली:

नियति का खेल भी कितना क्रूर होता है. जिस घर में कुछ दिन बाद बेटे के आने की खुशियां मनाई जानी थी, वहां अब मौत का सन्नाटा पसरा है. जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए भीषण सड़क हादसे ने यमुनानगर के शेरपुर गांव के सुधीर नरवाल (30) को हमसे छीन लिया. सुधीर तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे और घर के इकलौते चिराग थे.

27 जनवरी का वो वादा अधूरा रह गया

परिवार के सदस्यों ने भारी मन से बताया कि सुधीर से आखिरी बार 15 जनवरी को बात हुई थी. उन्होंने वादा किया था कि वे 27 जनवरी को छुट्टी लेकर घर आएंगे. पिछली बार दिवाली पर घर आए सुधीर एक शादी में शामिल होकर 12 नवंबर को ड्यूटी पर लौटे थे. परिवार को क्या पता था कि वह उनकी आखिरी मुलाकात होगी.

मेरे लाल को वापस ले आओ

सुधीर की शहादत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया. मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वे सुध-बुध खो बैठी हैं. अपने इकलौते बेटे को खोने के गम में डूबी मां हर आने-जाने वाले से बस एक ही गुहार लगा रही हैं. मेरे सुधीर को वापस ले आओ. गहरे सदमे में डूबी मां की जुबान से निकला एक-एक शब्द वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर रहा है, वे कह रही हैं. अपने बेटे को कभी आर्मी में मत भेजना.

जुनून ऐसा कि 20 किमी दूर जाते थे प्रैक्टिस करनेसुधीर के रग-रग में देशभक्ति थी. 2016 में सेना (27 आर्म्ड) में भर्ती होने वाले सुधीर ने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी. 12वीं पास करने के बाद उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी ताकि देश सेवा कर सकें. वे रोजाना गांव से 20 किलोमीटर दूर जगाधरी के तेजली खेल परिसर में पसीने बहाते थे. उनकी इसी लगन पर पूरे गांव को नाज था. वर्तमान में वे 'नायक' के पद पर तैनात थे.

पीछे छूट गया 4 साल का मासूम 'आयांश'

सुधीर अपने पीछे अपनी पत्नी रूबी, जो एक प्राइवेट नौकरी करती हैं, और 4 साल के मासूम बेटे आयांश को छोड़ गए हैं. पिता हरपाल के निधन के बाद सुधीर ही परिवार का एकमात्र सहारा थे. उनकी एक बहन न्यूजीलैंड में है और दूसरी शादीशुदा है. खराब मौसम के चलते शहीद की पार्थिव देह को घर लाने में देरी हो रही है, वहीं बहन भी विदेश से भाई के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की कोशिश कर रही है.

पूरा गांव गमगीन

सुधीर के छोटे भाई सुमित और परिजन सुरेश पाल ने बताया कि सुधीर बहुत ही होनहार और मिलनसार था. आज न सिर्फ एक परिवार ने अपना बेटा खोया है, बल्कि देश ने एक जांबाज योद्धा खो दिया है. शेरपुर गांव की गलियां आज सुनसान हैं और हर आंख नम है.

लेखक के बारे में
img
समरजीत सिंह
Deputy News Editor
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Doda Road Accident, Army Man Killed In Road Accident
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com