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This Article is From Aug 05, 2018

ट्यूमर की वजह से गल गई थी कंधे की हड्डी, ऑर्टिफिशियल कंधा लगाकर डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

डॉक्टरों के अनुसार सरिता हड्डियों के कांड्रोसारकोमा कैंसर से पीड़ित थी, दोबारा ट्यूमर न उभरे इसके लिए उसे मुंबई लेकर जाया जाएगा.

ट्यूमर की वजह से गल गई थी कंधे की हड्डी, ऑर्टिफिशियल कंधा लगाकर डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
लड़की को ऑर्टिफिशियल कंधा लगाया गया
नई दिल्ली: ट्यूमर किसी की जिंदगी को किस तरह से बर्बाद कर सकता है इसकी एक मिसाल हैं 26 वर्षीय युवती सरिता. सरिता के कंधे में लंबे समय से ट्यूमर था, इस वजह से उसके कंधे हड्डी भी गल गई थी. ट्यमर की वजह से सरिता ने दोबारा से सामान्य जिंदगी जीने का हौसला खो सा दिया था लेकिन इससे पहले की वह पूरी तरह से निराश होती हैं उसे एक नई जिंदगी मिल गई. डॉक्टरों ने उनके कंधे से 16 सेमी का ट्यूमर निकाल कर कंधे की गली हड्डियों की जगह आर्टिफिशियल कंधा लगा दिया. अब हर बीतते दिन के साथ सरिता एक सामान्य लड़की की तरह ही अपनी जिंदगी जीना शुरू कर रही है. डॉक्टरों के अनुसार सरिता हड्डियों के कांड्रोसारकोमा कैंसर से पीड़ित थी, दोबारा ट्यूमर न उभरे इसके लिए उसे मुंबई लेकर जाया जाएगा, जहां फोर डी टारगेटेड रेडिएशन से इलाज होगा. खास बात यह है कि जिन डॉक्टरों ने सरिता से इस सर्जरी के लिए कोई पैसे नहीं लिए. क्योंकि कैंसर के इलाज में परिजनों का सारा पैसा खत्म हो चुका था.

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वसंत विहार के होली एंजल अस्पताल में सरिता की सर्जरी की गई. आर्थोआन्को सर्जन और स्टेम सेल्स प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि कांड्रोसारकोमा एक विशेष तरह का ट्यूमर है जिसके लिए रेडियो या कीमोथेरेपी भी काम नहीं करती है. यही वजह है कि इलाज का ट्यूमर पर कोई असर नहीं हो रहा था और ट्यूमर पिछले तीन साल में बढ़कर 16 सेमी का हो गया. उन्होंने बताया कि दिल्ली के लगभग सभी अस्पतालों ने जवाब दे दिया था. सीटी स्कैन जांच में देखा गया कि ट्यूमर की वजह से कोहनी से लेकर कंधे तक हड्डी गल चुकी है, ट्यूमर यदि नहीं निकाला जाता तो वह बाकी अंगों को भी प्रभावित कर सकता था.

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सर्जरी कर पहले 16 सेमी ट्यूमर निकाला गया, इसके बाद कोहिनी से कंधे तक आर्टिफिशियल कंधा  लगाया गया. ट्यूमर दोबारा न पनपे इसके लिए महिला को मुंबई के एचसीजी अस्पताल फोर डी टारगेटेड थेरेपी दी जाएगी, जो देश की अब तक की पहले फोड डी तकनीक पर आधारित रेडियोथेरपी है. डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि ट्यूमर के बाद बची हुई सेल्स को खत्म करने फोरडी फोकस्ड थेरेपी दी जाएगी, जिसमें कैंसर युक्त सेल्स को चारों तरफ से घेर कर खत्म किया जाता है. 

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सर्जरी के नहीं लगे पैसे
सरिता के पति फैक्ट्री में काम करते हैं बीते तीन साल में बीमारी की वजह से घर की सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी है. मरीज की आर्थिक हालात देखते हुए मरीज से सर्जरी का पैसा नहीं लिया गया. बेहतर फोरडी रेडिएशन थेरेपी इलाज के लिए परिजनों ने आर्थिक मदद की अपील की है.
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