- उत्तम नगर में होली के दिन पानी के गुब्बारे को लेकर हुई हिंसा में 26 वर्षीय तरुण कुमार की हत्या हुई थी
- पुलिस ने इस मामले में 20 आरोपियों को चार्जशीट में नामजद किया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं
- हत्या की घटना एक सोची-समझी साजिश और संगठित हमले के रूप में हुई थी, जिसमें आरोपियों ने योजना बनाई थी
राजधानी दिल्ली के पश्चिमी जिले के उत्तम नगर में होली के दिन हुई 26 साल के युवक तरुण कुमार की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने करीब 550 पेज की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं.पुलिस की इस चार्जशीट में घटना की पूरी कहानी, आरोपियों की भूमिका और अब तक जुटाए गए सभी सबूतों को विस्तार से रखा गया है.
पुरानी दुश्मनी बनी वजह
पुलिस के मुताबिक, यह मामला पहली नजर में भले ही एक मामूली विवाद लगा, लेकिन इसके पीछे पहले से चली आ रही दुश्मनी भी एक बड़ी वजह थी.होली के दिन पानी के गुब्बारे को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने अचानक हिंसक रूप ले लिया.आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद एक बड़ी भीड़ ने तरुण कुमार को निशाना बनाया.उसे इलाके में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया और धारदार हथियारों से हमला भी किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
हमला अचानक नहीं हुआ, सोची-समझी साजिश थी
जांच में यह भी सामने आया है कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि इसमें शामिल कई लोग पहले से एकजुट थे.चार्जशीट में पुलिस ने इसे एक सोची-समझी साजिश और संगठित हमले के तौर पर पेश किया है. आरोपियों ने मिलकर तरुण को घेरने, उसका पीछा करने और हमला करने की पूरी योजना बनाई थी. इस दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और देखते ही देखते यह विवाद साम्प्रदायिक रंग भी लेने लगा, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए.
पुलिस ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए करीब 50 गवाहों से पूछताछ की.इनमें स्थानीय लोग, प्रत्यक्षदर्शी और घटना के समय मौजूद अन्य लोग शामिल हैं. इसके अलावा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया, जिससे आरोपियों की पहचान करने में बड़ी मदद मिली. फॉरेंसिक टीम की रिपोर्ट ने भी यह साफ किया कि तरुण पर किस तरह का हमला हुआ और किन हथियारों का इस्तेमाल किया गया.
चार्जशीट में एक-एक बात की डिटेल
चार्जशीट में हर आरोपी की भूमिका को अलग-अलग तरीके से समझाया गया है. किसने हमला किया, किसने उकसाया, किसने भीड़ को इकट्ठा किया और किसने पीड़ित को पकड़कर रखा.इन सभी पहलुओं को पुलिस ने विस्तार से दर्ज किया है. यही नहीं, घटना के बाद आरोपियों की गतिविधियों, उनके छिपने की कोशिशों और सबूतों को मिटाने के प्रयासों का भी जिक्र चार्जशीट में किया गया है.
कानूनी तौर पर इस केस को मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, आपराधिक साजिश और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं लगाई हैं. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित के घर या इलाके में जबरन घुसने की कोशिश की थी, जिसके चलते ट्रेसपास की धारा भी जोड़ी गई है.
दो आरोपी अब भी फरार
इस मामले में दो आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है. वहीं, दो नाबालिग आरोपियों के मामले को अलग से जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने रखा गया है.उनके खिलाफ कानून के तहत अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी. फिलहाल, बाकी वयस्क आरोपियों के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में सुनवाई चलेगी.यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि एक छोटी सी बात पानी के गुब्बारे को लेकर हुआ विवाद इतनी बड़ी हिंसक घटना में बदल गया, जिसमें एक युवक की जान चली गई. इस केस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता आक्रोश और भीड़ की मानसिकता किसी की जिंदगी खत्म कर सकती है.
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