- दिल्ली से विशाखापट्टनम तक महा-कॉरिडोर देश के छह राज्यों को जोड़ने वाला विशाल एक्सप्रेसवे नेटवर्क होगा
- इस कॉरिडोर से दिल्ली से रायपुर का सफर 12 घंटे और विशाखापट्टनम तक 20 घंटे में पूरा किया जा सकेगा
- इस नेटवर्क में यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-ग्वालियर लिंक, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर शामिल होंगे
देशभर में कई नए हाइवे और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं. इन एक्सप्रेसवे से शहरों और राज्यों की दूरी काफी कम हो गई है. ये एक्सप्रेसवे एक राज्य से दूसरे राज्य की कनेक्टिविटी बेहतर करेंगे और एक लाइफलाइन बनेंगे. आज हम ऐसे ही एक 'एक्सप्रेसवे नेटवर्क' की बात कर रहे हैं, जो राजधानी दिल्ली को सीधे दक्षिण-पूर्व के प्रमुख औद्योगिक और समुद्री केंद्र विशाखापट्टनम से जोड़ देगा. इस पूरे विशाल नेटवर्क को 'नॉर्थ टू ईस्ट कोस्ट महा-कॉरिडोर' कहा जा सकता है. इस महा-कॉरिडोर के पूरी तरह तैयार होने के बाद, दिल्ली से रायपुर का सफर महज 12 घंटे और विशाखापट्टनम का सफर मात्र 20 घंटे में पूरा किया जा सकेगा.
इन एक्सप्रेसवे और नेशनल हाइवे का 'महा-नेटवर्क'
यह कोई एक अकेली सड़क नहीं, बल्कि देश के सबसे खास एक्सप्रेसवे और हाइवे का एक विशाल नेटवर्क होगा. दिल्ली से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और फिर वहां से विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंचने के लिए वाहन इन रास्तों का इस्तेमाल कर सकेंगे.
- यमुना एक्सप्रेसवे: दिल्ली-NCR से वाहन आगरा तक पहुंचेंगे.
- आगरा–ग्वालियर लिंक एक्सप्रेसवे: इसके बाद वाहन प्रस्तावित आगरा-ग्वालियर लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए मध्यप्रदेश में दाखिल होंगे.
- NH-44 (जबलपुर सेक्शन) और NH-30: मध्य प्रदेश के सागर, जबलपुर से होते हुए छत्तीसगढ़ के बॉर्डर कवर्धा और फिर सीधे रायपुर तक कनेक्टिविटी.
- रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर: यह कॉरिडोर आखिरी और सबसे अहम हिस्सा होगा. ये प्रस्तावित रास्ता भी तीन चरणों में बांटा गया है. पहले दुर्ग–रायपुर बाईपास से लोकल ट्रैफिक से बचेंगे. इसके बाद रायपुर–ओडिशा बॉर्डर में दाखिल होंगे. ये छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र कांकेर, कोंडागांव को ओडिशा की सीमा से जोड़ने वाला हिस्सा है.
- ओडिशा–विशाखापट्टनम ग्रीनफील्ड एक्सेस: ओडिशा के नबरंगपुर और कोरापुट से गुजरते हुए आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट तक माल की आवाजाही को सुगम बनाने वाला पूरी तरह से नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा.

इन 6 राज्यों की कनेक्टिविटी
- दिल्ली-NCR: यमुना एक्सप्रेसवे की शुरुआत नोएडा से होती है. यहां तक दिल्ली से नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से पहुंचा जा सकता है.
- उत्तर प्रदेश: यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा पहुंचेंगे और फिर आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे (लिंक) और NH-44 के जरिए झांसी होते हुए एमपी तक पहुंचेंगे.
- मध्य प्रदेश: ग्वालियर के बाद एमपी के सागर, दमोह और जबलपुर तक की कनेक्टिविटी.
- छत्तीसगढ़: NH-30 के जरिए कवर्धा होते हुए छत्तीसगढ़ के रायपुर और दुर्ग तक पहुंच.
- ओडिशा: नबरंगपुर और कोरापुट भी कनेक्ट होगा.
- आंध्र प्रदेश: यह कॉरिडोर आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सबावरम होते हुए सीधे विशाखापट्टनम तक की पहुंच आसान करेगा.
सफर का समय घटकर हो जाएगा आधा
इस महाकॉरिडोर के बनने के बाद 6 राज्यों के कई शहरों की दूरी कम हो जाएगी. दिल्ली से ग्वालियर का सफर 4-5 घंटे में पूरा हो पाएगा, जहां अभी 6 से 7 घंटे लग जाते हैं. वहीं ग्वालियर से जबलपुर की 480 किमी की दूरी 6 घंटे में पूरी हो सकेगी. यहां फिलहाल 9 से 10 घंटे लग जाते हैं. वहीं जबलपुर से रायपुर की करीब 356 किमी का सफर 9 से 11 घंटे से घटकर 4 से 5 घंटे हो जाएगा. इसके आलावा रायपुर से विशाखापट्टनम की करीब 464 किमी दूरी 5 से 6 घंटे में पूरी हो पाएगी. इसमें फिलहाल 12 से 13 घंटे लग जाते हैं. यानी दिल्ली से रायपुर महज 12 घंटे और विशाखापट्टनम 20 घंटे में पहुंचा जा सकेगा.
इस महा-कॉरिडोर से क्या बदलेगा?
इस कॉरिडोर के बनने के बाद नक्सल प्रभावित और दुर्गम माने जाने वाले बस्तर और आंध्र के विजयनगरम जैसे आदिवासी क्षेत्रों तक इस कॉरिडोर के जरिए सीधे उद्योगों और रोज़गार की पहुंच होगी. इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा और यूपी के कारखानों का माल अब बिना किसी देरी के सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंच सकेगा, जिससे एक्सपोर्ट आसान हो पाएगा.
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