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जंतर-मंतर पर जाति आधारित आरक्षण का विरोध, आधी रात हुआ बवाल, हिरासत में लिए गए राजघाट पहुंचे प्रदर्शनकारी

सन्नी द्विवेदी नाम के प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारे साथ तानाशाही की गई. हमें लाठी डंडों से भगाया गया. हमें धमकाया गया और कहां गया कि तुम्हें डिटेन करके ले जाया जाएगा. हमारा मंच तोड़ दिया गया. हम राजघाट पर आए तो हमें यहां बसों में भरा जा रहा है.'

जंतर-मंतर पर जाति आधारित आरक्षण का विरोध, आधी रात हुआ बवाल, हिरासत में लिए गए राजघाट पहुंचे प्रदर्शनकारी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक और विरोध प्रदर्शन. (IANS)
  • दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति आधारित आरक्षण के विरोध में युवा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं
  • प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बावजूद पुलिस ने उनको खदेड़ दिया
  • पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लागू की और राजघाट पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
नई दिल्ली:

दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक और विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है, जो कि जाति आधारित आरक्षण के विरोध में है.शुक्रवार को सैकड़ों युवा जंतर-मंतर पर जुटे. देर शाम सुरक्षाबलों ने उनको यहां से हटा दिया, लेकन 22 अगस्त, शनिवार को बड़ी संख्या में युवाओं के जुटने की संभावना जताई जा रही है. शनिवार तड़के कई प्रदर्शनकारी बापू की समाधि राजघाट पहुंचे थे. इस दौरान पुलिस ने उनको हिरासत में ले लिया. प्रदर्शनकारी छात्र पुलिस के इस एक्शन से नाराज हैं. उनका कहना है कि हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हिंसा और उत्पात मचाया गया था, जबकि हम लोग तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि सवर्ण, यूजीसी और सामान्य गरीब को भी आरक्षण मिले. आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने शुरुआत से ही अहिंसक तरीके से आवाज उठाई, लेकिन जंतर मंतर पर पहले से मौजूद अन्य समूहों की वजह से उन्हें वहां से हटाया गया.

पुलिस ने हमें खदेड़ा- प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारी बता रहे हैं कि "कॉकरोच पार्टी" के समर्थकों ने पिछले कई दिनों से जंतर मंतर पर कब्जा बनाए रखा हुआ था, जिससे उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा आई. उन्होंने आरोप लगाया कि समान व्यवहार नहीं किया गया और उन्हें जंतर मंतर से खदेड़ दिया गया. राजघाट पर पहुंचने पर सुरक्षा बलों ने स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए हस्तक्षेप किया और भीड़ को व्यवस्थित करने के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. पुलिस ने धारा 144 के तहत कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए.

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पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप

पंकज नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम जंतर मंतर पर शांति पूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे. मैंने भूख हड़ताल की घोषणा की थी. हमारे एक हजार लोगों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया. क्या हमने पुलिस पर हमला किया ? क्या हमने किसी को गाली दी ? हमने शांति से आंदोलन किया हमने डिमांड की हमे आन्दोलन करने का अधिकार दो, हमें मारा गया पीटा गया." 

अभिषेक ठाकुर  नाम के प्रदर्शनकारी ने कहा, 'मैं यह कहना चाहता हूं कि हम यूजीसी के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, हमारा आंदोलन एक दिन में खत्म करवा दिया गया. काकरोच जनता पार्टी ने परमिशन ली थी या नहीं, फिर भी  उनका आंदोलन 32 दिन चला हमारे साथ ऐसा क्यों." 

'हमारा मंच तोड़ा, हमें बसों में भरकर ले गए'

सन्नी द्विवेदी नाम के प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारे साथ तानाशाही की गई. हमें लाठी डंडों से भगाया गया. हमें धमकाया गया और कहां गया कि तुम्हें डिटेन करके ले जाया जाएगा. हमारा मंच तोड़ दिया गया. हम राजघाट पर आए तो हमें यहां बसों में भरा जा रहा है.'

भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच विरोध स्थल और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. बड़ी संख्या में लोग बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर मौके पर जमा हुए और जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों को सोशल मीडिया के जरिए इस विरोध प्रदर्शन के लिए लामबंद किया गया था. उनकी मांग थी कि सरकारी सहायता और आरक्षण की पात्रता तय करने में जाति के बजाय आर्थिक मानदंड को प्राथमिकता दी जाए.

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जंतर-मंतर पर सुरक्षा, प्रदर्शन की परमिशन नहीं

पुलिस ने प्रदर्शन से पहले ही इलाके के प्रमुख स्थलों पर पुलिस कर्मियों और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया और जंतर-मंतर की ओर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए अवरोधक लगा दिए. दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी भी विरोध, जुलूस, प्रदर्शन या सभा के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी.

हालांकि, मध्य जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कार्यालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, शुक्रवार को एक अलग स्थल रामलीला मैदान पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के बैनर तले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया गया था. शाम चार बजे तक रामलीला मैदान में अधिकतम 500 लोगों को एकत्र होने की अनुमति दी गई थी. पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन पर उसे 'कोई आपत्ति नहीं' थी.

क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?

इस विरोध अभियान का नेतृत्व 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' द्वारा किया गया, जो इंस्टाग्राम पर एक पेज है. इसने लोगों से 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी. इंस्टाग्राम पर इस पेज के 56 लाख फॉलोअर्स हैं. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए सरकारी सहायता किसे मिलनी चाहिए, यह तय करते समय आर्थिक स्थिति पर विचार किया जाए.

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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारी मांग है कि सरकारी मदद को लेकर आर्थिक स्थिति पर विचार किया जाए. जाति से परे, किसी भी गरीब व्यक्ति को शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए सहायता प्रदान की जानी चाहिए.'

आरक्षण के खिलाफ युवाओं का विरोध प्रदर्शन

एक अन्य प्रतिभागी ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि इसके लाभ हमेशा सबसे वंचित वर्गों तक नहीं पहुंचते हैं. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में क्रीमी-लेयर मानदंड लागू करने की भी मांग की और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित नीतियों में बदलाव की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के ढांचे सहित उच्च शिक्षा नीतियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए.

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