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इस्तीफा Vs इस्तीफा! शंकराचार्य पर महासंग्राम की पूरी कथा, पढ़िए इनसाइड स्टोरी

शंकराचार्य के समर्थन में एक दिन पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिहोत्री ने इस्तीफा दिया था. अब शंकराचार्य के विरोध में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने त्यागपत्र दे दिया है. इस पूरे मामले पर राजनीति और भी गरमा गई है.

इस्तीफा Vs इस्तीफा! शंकराचार्य पर महासंग्राम की पूरी कथा, पढ़िए इनसाइड स्टोरी
  • इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिहोत्री को योगी सरकार ने सस्पेंड कर दिया है
  • अब अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने शंकराचार्य का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया है
  • शंकराचार्य विवाद पर उमा भारती से लेकर इमरान मसूद और प्रवीण तोगड़िया तक के बयान आए हैं
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर यूपी में इस्तीफों की झड़ी लग रही है. एक दिन पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिहोत्री ने शंकराचार्य के समर्थन में इस्तीफा दिया था. योगी सरकार ने इस्तीफा तो मंजूर नहीं किया, उल्टा सख्त कार्रवाई करते हुए सस्पेंड कर दिया. ये विवाद चल ही रहा था कि एक और बड़े अफसर ने त्यागपत्र दे दिया है. अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने शंकराचार्य का विरोध करते हुए पद छोड़ दिया है. इस पूरे मामले पर राजनीति और भी गरमा गई है. 

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने क्यों पद छोड़ा? 

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिहोत्री ने सरकारी नीतियों खासकर यूजीसी के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को इस्तीफा दे दिया था. इससे बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. अलंकार अग्रिहोत्री ने मंगलवार को डीएम पर गंभीर आरोप लगाए. अपशब्द कहने का आरोप लगाते हुए डीएम ऑफिस में धरना दिया. कहा कि डीएम के कैंप ऑफिस में उन्हें रातभर बंधक बनाकर रखने की कोशिश की गई. हालांकि डीएम ने आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए कहा कि इनका जमीनी हकीकत से कोई संबंध नहीं है. 

योगी सरकार ने सख्त कार्रवाई कर दी

2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अग्निहोत्री ने यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली के डीएम अविनाश सिंह को ईमेल के जरिए इस्तीफा भेजा. योगी सरकार ने हालांकि अलंकार का इस्तीफा मंजूर नहीं किया, उल्टा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सस्पेंड कर दिया. सिटी मजिस्ट्रेट से सरकारी गाड़ी और बाकी सुविधाएं ले ली गईं. 

GST डिप्टी कमिश्नर ने क्यों किया रिजाइन?

ये विवाद चल ही रहा था कि एक और बड़े अफसर ने इस्तीफा दे दिया. मंगलवार को अयोध्या में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने त्यागपत्र देते हुए कहा कि जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की हालिया कोशिशों से उन्हें गहरा दुख हुआ है. उन्होंने इस्तीफे का फैसला शंकराचार्य के खिलाफ लिया है. आरोप लगाया कि शंकराचार्य ने सीएम योगी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है. 

नमक और रोबोट का भी किया जिक्र 

2023 से अयोध्या में राज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने कहा कि जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, जहां से मुझे सैलरी मिलती है, मैं उनका पक्षधर हूं. योगी चुने हुए मुख्यमंत्री हैं और मैं उनका अपमान बर्दाश्त नहीं करूंगा. उन्होंने कहा कि ये मेरा राजकीय धर्म है, मैं वेतनभोगी रोबोट जैसे काम नहीं कर सकता. 

शंकराचार्य ने इस्तीफों पर क्या कहा? 

शंकराचार्य ने जहां इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्रिहोत्री की तारीफ की थी, उन्हें बड़ा पद देने की बात कही थी. वहीं प्रशांत सिंह के इस्तीफे को शंकराचार्य ने चापलूसी बताया. आरोप लगाया कि ये अफसर चापलूसी कर रहा. योगी इस्तीफा स्वीकार करके दिखाएं. सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे को काटने के लिए इन्होंने बैठक की होगी. उसके बाद ही सोची समझी साजिश के तहत चापलूसी कर इस्तीफा दिया. 

ये भी देखे- बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच फोन पर हुई क्या बात, जानें

उमा भारती का योगी के अफसरों पर निशाना

अधिकारियों के इस्तीफे से शंकराचार्य विवाद और गहरा गया. इधर राजनीति भी गरमा गई. मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की फायरफ्रांड नेता उमा भारती ने बड़ा बयान दिया. उमा भारती ने शंकराचार्य विवाद पर प्रशासन को फटकारा, कहा- शंकराचार्य से सबूत मांगकर मर्यादा का उल्लंघन किया है, क्योंकि प्रशासन को शंकराचार्य होने का सबूत मांगने का हक नहीं है. ये अधिकार सिर्फ शंकराचार्यों और विद्वत परिषद के पास है. ऐसे में प्रशासनिक अफसरों ने मर्यादा और अधिकारों की हद पार की है. 

फिर सफाई दी- मैं योगी विरोधी नहीं 

शंकराचार्य के समर्थन को उमा का योगी विरोधी कदम माना जाने लगा, तो उन्होंने सफाई देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि योगी विरोधी खुशफहमी न पालें, उनका बयान मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ नहीं है. मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है, यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं.

ये भी देखें- 'योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें'... अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर उमा भारती के एक बयान से दो निशाने

जियाउर्रहमान बर्क भी विवाद में कूदे

इस विवाद में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क भी कूद पड़े. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अभी तक मुस्लिम और उनके धर्मगुरुओं से ज्यादती हो रही थी, लेकिन अब हिंदुओं के शंकराचार्य के साथ भी ऐसी घटना हो रही है. ये अफसोसजनक है, धर्मगुरुओं का सम्मान होना चाहिए. उनका किसी भी तरह से अपमान नहीं किया जाना चाहिए. 

कांग्रेस ने बीजेपी को निशाने पर ले लिया

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी तीखा बयान दे डाला. उन्होंने कहा कि मैं शंकराचार्य के अपमान और उनके शिष्यों की कथित पिटाई से आहत हूं. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार अपमान ही बीजेपी की तथाकथित धर्मनिष्ठा की हद है. आज शंकराचार्य होने का सबूत मांग रहे हैं, कल किसी और से मांगेंगे. 

प्रवीण तोगड़िया ने दी भाइयों की दुहाई 

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हिंदूवादी नेता प्रवीण तोगड़िया भी सामने आए. कहा कि शंकराचार्य और योगी आदित्यनाथ दोनों ही पूजनीय हैं. भाइयों में तकरार हो जाती है, फिर सब ठीक हो जाता है. 

परमहंस महाराज बोले, बैन कर दो

अयोध्या छावनी धाम के परमहंस महाराज भी सामने आए. उन्होंने मांग कर दी कि अविमुक्तेश्वरानंद पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगना चाहिए. अविमुक्तेश्वरानंद और सतुआ बाबा ने माघ मेले को बदनाम किया है. दोनों के माघ मेले में आने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए. 

योगी को खून से खत भी लिखा गया

उधर विवाद सुलझाने के लिए सीएम योगी को खून से खत भी लिख दिया गया है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी बाबा ने ये पत्र लिखा है. इसमें कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को सम्मान के साथ गंगा स्नान कराया जाए. साथ ही अफसरों को माफी मांगने के लिए आदेश दिए जाएं. बहरहाल, इस मामले राजनीति चरम पर है. अधिकारियों के इस्तीफे ने इस विवाद की आग में घी का काम किया है. देखना होगा कि शंकराचार्य पर ये 'धर्मयुद्ध' आगे क्या रूप लेता है.

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