- ओला इलेक्ट्रिक के CEO भविष अग्रवाल के खिलाफ गोवा के जिला उपभोक्ता आयोग ने गिरफ्तारी का आदेश जारी किया है.
- यह कार्रवाई ग्राहक प्रीतिश घाड़ी की शिकायत पर हुई है, जिन्होंने बाइक मरम्मत के बाद गायब होने की बात कही है.
- आयोग ने नोटिस जारी कर 4 फरवरी को व्यक्तिगत हाजिरी मांगी थी, लेकिन गैरहाजिरी पर वारंट जारी किया गया है.
OLA इलेक्ट्रिक की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कई जगहों पर OLA स्कूटी में आग लगने की घटनाओं के बीच अब OLA इलेक्ट्रिक के CEO भविष अग्रवाल (Bhavish Aggarwal) को गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया गया है. यह आदेश कंफ्यूमर फोरम की ओर से जारी किया गया है. जारी आदेश में उपभोक्ता आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक के CEO भविष अग्रवाल के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है.
यह आदेश गोवा के मडगांव स्थित जिला उपभोक्ता आयोग (District Consumer Commission, Margao) ने दिया है. बताया गया कि यह कार्रवाई कंज्यूमर कंप्लेंट के तहत की गई है. ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी नामक ग्राहक ने शिकायत की थी. जिसके बाद Ola Electric Technologies Pvt. Ltd. के सीईओ को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है.
आयोग में हाजिर नहीं होने पर गिरफ्तारी का आदेश जारी
आयोग की ओर से 28 जनवरी 2026 को नोटिस जारी कर भविष अग्रवाल को 4 फरवरी 2026 सुबह 10:30 बजे आयोग के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा गया था. यह नोटिस कथित तौर पर स्पष्टीकरण के लिए था. लेकिन तय तारीख पर उनकी गैरहाज़िरी के बाद आयोग ने सख्त रुख अपनाया और अब उनके खिलाफ जमानती वारंट (Bailable Warrant) जारी कर दिया है.
पुलिस को क्या निर्देश?
आयोग ने बेंगलुरु के कोरमंगला स्थित संबंधित पुलिस स्टेशन को निर्देश दिया है कि वे भविष अग्रवाल को गिरफ्तार कर 23 फरवरी 2026 सुबह 10:30 बजे आयोग के सामने पेश करें. हालांकि, आदेश में यह भी साफ किया गया है कि अगर वे 1,47,499 रुपये की जमानत राशि और समान रकम की एक ज़मानतदार पेश कर देते हैं, तो उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है, बशर्ते वे अगली सुनवाई पर आयोग के सामने उपस्थित हों.
मरम्मत के लिए दी गई इलेक्ट्रिक बाइक हुई गायब
रिपोर्ट के अनुसार प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी नामक ग्राहक ने ओला के खिलाफ शिकायत दी थी. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी खरीदी गई इलेक्ट्रिक बाइक मरम्मत के लिए ओला को दी गई थी, लेकिन अब उसका कोई अता-पता नहीं है. हैरानी की बात यह है कि बाइक की पूरी कीमत पहले ही ओला को चुका दी गई थी.
अब 23 फरवरी पर टिकी सबकी निगाहें
ग्राहक ने आगे कहा कि उनकी शिकायत के बाद भी न तो उन्हें उनकी स्कूटी बाइक मिली और ना हीं संतोषजनक जवाब. अब सबकी नजर 23 फरवरी की सुनवाई पर है, जब यह साफ होगा कि भविष अग्रवाल आयोग के सामने पेश होते हैं या फिर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ती है. फिलहाल, ओला इलेक्ट्रिक या भविष अग्रवाल की ओर से इस आदेश पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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