- संसदीय समिति ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है
- समिति ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों को लेकर कड़ा रुख अपनाने की जरूरत बताई
- AI पर विशेष शैक्षणिक कोर्स शुरू करने का सुझाव दिया, ताकि युवाओं को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा सके
भारत में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल पर बैन लग सकता है. दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ा रुख अपनाने की सिफारिश की है. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली इस समिति ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार करने की बात कही है.
सोशल मीडिया का बच्चों पर बुरा असर
दूरसंचार और आईटी मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी के मुताबिक, सोशल मीडिया का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, गोपनीयता और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों में पहले ही इस तरह के प्रतिबंध लागू किए गए हैं और भारत को भी अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीख लेनी चाहिए. इसी क्रम में समिति ने सुझाव दिया है कि भारत में भी कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को नियंत्रित करने या सीमित करने के लिए कानूनी और तकनीकी उपाय किए जाएं.

बच्चों को सिखाएं AI
समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत के कई राज्यों में इस दिशा में मंथन शुरू हो चुका है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को लेकर तैयार की गई इस रिपोर्ट में एक अन्य अहम सिफारिश के तहत एआई से जुड़े विशेष शैक्षणिक कोर्स शुरू करने की बात कही गई है, ताकि युवाओं को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा सके. समिति की यह रिपोर्ट आज संसद में टेबल की जाएगी.
570 एआई और डेटा लैब्स स्थापित की जा रही
समिति का मानना है कि इंडिया AI फ्यूचर स्किल्स पिलर इंडिया AI मिशन की एक बहुत महत्वपूर्ण पहल है. इसका उद्देश्य भारत में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की प्रतिभा को विकसित करना है. इसके तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति और फैलोशिप कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा एआई में विशेषज्ञ बन सकें. इसके अलावा, देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में 570 एआई और डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं. ये लैब्स सरकारी आईटीआई, पॉलिटेक्निक संस्थानों और एनआईईएलआईटी केंद्रों में होंगी, जहां छात्रों को आधुनिक उपकरणों और डेटासेट के साथ प्रयोग करने और समस्याओं का समाधान खोजने का अवसर मिलेगा. यह पहल कृषि, स्वास्थ्य, विनिर्माण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में शुरुआती स्तर की एआई नौकरियों के लिए युवाओं को तैयार करेगी. इसके लिए एनसीवीईटी से मान्यता प्राप्त प्रमाणन भी दिए जाएंगे.
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ना हो भारत में AI का गलत इस्तेमाल
समिति चाहती है कि एआई की पढ़ाई को और बढ़ावा दिया जाए. इसके लिए स्कूल और कॉलेज स्तर से ही एआई को लोकप्रिय बनाया जाए, सभी विश्वविद्यालयों में एआई पर शोध और पीएचडी को प्रोत्साहित किया जाए तथा देशभर में डेटा सेंटर और एआई लैब्स स्थापित की जाएं. समिति यह भी मानती है कि एआई का नैतिक और जिम्मेदार उपयोग बहुत जरूरी है. आज कई देशों ने एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं. भारत सरकार भी एआई के गलत इस्तेमाल, जैसे वित्तीय धोखाधड़ी, धमकी या डीपफेक से लोगों की सुरक्षा के प्रयास कर रही है. फिर भी समिति सरकार से आग्रह करती है कि एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक व्यापक कानून पर विचार किया जाए. समिति का विश्वास है कि एआई का सही और सकारात्मक उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में लोगों का जीवन बेहतर बना सकता है. भारत की विशाल आईटी और तकनीकी प्रतिभा के साथ एआई देश के विकास और आम जनता की जीवन-गुणवत्ता को बेहतर बनाने में बड़ा योगदान दे सकती है.
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