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This Article is From May 04, 2023

भ्रष्टाचार के केस में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व प्रमुख को CBI ने दी क्लीन चिट

सीबीआई ने 2016 में दर्ज मामले में आरोप लगाया था कि अर्चना भार्गव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और पति और उनके बेटे के स्वामित्व वाली कंपनी रैंक मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड (आरएमपीएल) के लिए आर्थिक लाभ हासिल किया

भ्रष्टाचार के केस में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व प्रमुख को CBI ने दी क्लीन चिट
जांच में अपराध से संबंधित कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली.
नई दिल्ली:

पूर्व बैंकर अर्चना भार्गव और उनके परिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के एक मामले में क्लीन चिट दे दी है, क्योंकि एजेंसी की जांच में कोई सबूत नहीं मिला. सीबीआई ने 2016 में दर्ज मामले में आरोप लगाया था कि अर्चना भार्गव ने अपने पद का दुरुपयोग किया. 

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि अर्चना भार्गव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और पति और उनके बेटे के स्वामित्व वाली कंपनी रैंक मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड (आरएमपीएल) के लिए आर्थिक लाभ हासिल किया. आरोप था कि उन्होंने अनिल धीरूभाई ग्रुप ऑफ कंपनीज, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड, पुंज लॉयड लिमिटेड से आरएमपीएल के लिए आर्थिक लाभ लिया. इसके लिए उनके कार्यकाल में विभिन्न ऋण सुविधाएं दी गईं.

अर्चना भार्गव 2011 में केनरा बैंक में कार्यकारी निदेशक और 2011-2013 से यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की चेयरमैन और प्रबंध निदेशक थीं.

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि कोलकाता की एक शेल कंपनी अस्तभुजा डीलट्रेड प्राइवेट लिमिटेड (एडीपीएल) से आरएमपीएल के खाते में बिना किसी लेन-देन के 1.10 करोड़ रुपये जमा किए गए थे. इसके बारे में केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया था कि अर्चना भार्गव द्वारा दूसरों के लिए क्रेडिट लाभ देकर वित्तीय लाभ प्राप्त किया गया था. 

सीबीआई ने इन लेन-देन को उन कंपनियों से "संदिग्ध" और "क्विड प्रो क्वो" (किसी चीज़ के बदले में किए गए एहसान) के रूप में फ़्लैग किया, जिन्होंने भार्गव के नेतृत्व वाले बैंकों से ऋण लाभ प्राप्त किया था.

एजेंसी ने एक अन्य आरोप की भी जांच की कि आरएमपीएल ने 2009-2013 के बीच गैर-संबंधित संस्थाओं को प्रीमियम मूल्य पर शेयर जारी करके लगभग 1.33 करोड़ रुपये जुटाए.

सूत्रों ने कहा कि 2020 में, सीबीआई ने अपनी जांच पूरी की और मामले को बंद करने का फैसला किया क्योंकि अर्चना भार्गव के खिलाफ आरोप "अप्रमाणित" थे.

हालांकि, साल 2022 में दिल्ली की एक सीबीआई अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और भ्रष्टाचार के मामले की आगे की जांच करने और कोलकाता में शेल कंपनी से आरएमपीएल के खाते में 1.15 करोड़ रुपये के "संदिग्ध क्रेडिट" की जांच करने का आदेश दिया.

आरएमपीएल और एडीपीएल के बीच लेनदेन की जांच के लिए सीबीआई गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) पहुंची. जांच में किसी भी तरह की अपराध से संबंधित कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली.

अर्चना भार्गव ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का नेतृत्व करते हुए 2014 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) मांगी थी.

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