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23 देशों का भरोसा, 90 टन वजन और हर मौसम में उड़ान... क्यों आसमान का 'सिकंदर' है C-130

भारत के पास कई सैन्‍य परिवहन विमान हैं. हालांकि सी-130जे का कोई मुकाबला नहीं है. भारत के पास करीब एक दर्जन सी-130जे विमान हैं. यह विमान कई खूबियों से लैस है.

23 देशों का भरोसा, 90 टन वजन और हर मौसम में उड़ान... क्यों आसमान का 'सिकंदर' है C-130
  • PM नरेन्द्र मोदी को लेकर भारतीय वायुसेना का विमान सी-130जे असम के मोरान में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा पर उतरा.
  • भारत के पास करीब 12 C-130J विमान हैं, जिनमें 6 विमान 2011 और 6 विमान 2017 में सप्लाई किए गए थे.
  • C-130J विमान दुर्गम इलाके में संचालन के लिए उपयुक्त है. यह खराब मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम के एक दिवसीय दौरे हैं. इस दौरान पीएम मोदी डिब्रूगढ़ जिले के चबुआ हवाई क्षेत्र पर पहुंचे और इसके बाद वह भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान से मोरन स्थित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) पहुंचे. अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन का सी-130 विमान अपने आप में एक बेहद विशाल विमान है और भारत की रक्षा जरूरतों के लिहाज से बेहद मुफीद भी. आइए जानते हैं कि भारत के पास कितने सी-130जे विमान हैं और यह रणनीतिक रूप से भारत के लिए बेहद खास क्‍यों हैं. आइए जानते हैं. 

भारत के पास कई सैन्‍य परिवहन विमान हैं. हालांकि सी-130जे का कोई मुकाबला नहीं है. भारत के पास करीब एक दर्जन सी-130जे विमान हैं. इनमें से पहले छह विमानों को 2011 में सप्‍लाई किए गए थे और अगले छह विमानों को 2017 में डिलीवर किया गया था.

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C-130 विमान जानिए क्‍यों हैं खास बात 

  • C-130J विमान 30 मीटर लंबा और 12 मीटर ऊंचा है. यह 19 टन वजन उठाकर ले जा सकता है. 
  • यह विमान 643 किमी की रफ्तार से उड़ सकता है और एक बार में 3,334 किमी उड़ान भर सकता है.
  • विमान को दुर्गम इलाकों में बेहतर ढंग से काम करने के लिए अपग्रेड किया गया है. 
  • 4 इंजन वाला ये विमान करीब 90 आम यात्रियों या 64 सैनिकों के साथ उड़ान भर सकता है.
  • ये विमान बहुत छोटे रनवे पर उतर सकता है और ऊबड़-खाबड़ जमीन पर भी लैंड कर सकता है. 
  • इसकी एक और खासियत ये है कि ये विमान खराब से खराब मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम है.
  • C-130J विमान के नाम 54 वर्ल्‍ड रिकॉर्ड भी दर्ज हैं. 
  • अमेरिका और भारत समेत 23 से ज्यादा देश इस विमान का इस्तेमाल करते हैं. 
  • लॉकहीड मार्टिन 560 से ज्यादा C-130J विमान बनाकर डिलीवर कर चुकी है. 
  • क्वाड के तीन अन्य देश अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान इस विमान का इस्तेमाल करते हैं. 

80 सी-130जे विमान खरीदने की तैयारी!

भारत 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट  खरीदे जाने की तैयारी है. ऐसे में पिछले साल दिसंबर में अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अपने सी-130जे सुपर हरक्यूलिस को एक बड़े विकल्‍प के रूप में पेश किया था. साथ ही कहा कि यदि उन्‍हें मौका मिलता है, तो वह भारत में इस विमान के उत्पादन के लिए एक बड़ा केंद्र स्थापित करेंगे और यह अमेरिका के बाहर इस तरह की पहली वैश्विक सुविधा होगी. अब तक लॉकहीड मार्टिन सी-130जे सुपर हरक्यूलिस श्रेणी के 560 से अधिक विमानों की आपूर्ति कर चुकी है, जिन्होंने 30 लाख से अधिक उड़ान घंटे पूरे किए हैं. 

भारत में प्रोडक्‍शन हब बनाने का वादा

भारतीय वायुसेना सोवियत दौर के AN-32 और IL-76 विमानों का इस्‍तेमाल कर रही है. इन्‍हें बदलने के लिए 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने की तैयारी में है. इसके लिए ब्राजील की एम्ब्रेयर का केसी-390 मिलेनियम और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस का ए-10एम विमान भी रेस में है. लॉकहीड मार्टिन का ऑफर है कि कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर वह अमेरिका के बाहर C-130J के लिए दुनिया का पहला प्रोडक्शन हब भारत में स्थापित करेगी.

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ये कंपनियां भी हैं रेस में

भारतीय वायुसेना सोवियत दौर के AN-32 और IL-76 विमानों का इस्‍तेमाल कर रही है. इन्‍हें बदलने के लिए 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने की तैयारी में है. इसके लिए ब्राजील की एम्ब्रेयर का केसी-390 मिलेनियम और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस का ए-10एम विमान भी रेस में है. लॉकहीड मार्टिन का ऑफर है कि कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर वह अमेरिका के बाहर C-130J के लिए दुनिया का पहला प्रोडक्शन हब भारत में स्थापित करेगी.

लॉकहीड मार्टिन ने टाटा के साथ मिलकर बेंगलुरू में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सेंटर बनाने की भी घोषणा की है. यह सेंटर 2027 की शुरुआत में चालू हो सकता है. साथ ही हैदराबाद स्थित टाटा लॉकहीड मार्टिन एरोस्ट्रक्चर लिमिटेड (TLMAL) में C-130J का एम्पिनेज (पिछला हिस्सा) बनाया जाता है. ऐसे 250 से अधिक पुर्जे अब तक भारत से अमेरिका भेजे जा चुके हैं.

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भारत के लिहाज से बेहद महत्‍वपूर्ण है सी-130जे? 

भारतीय वायुसेना को एक ऐसे सैन्‍य विमान की आवश्‍यकता है जो बड़े पैमाने पर जंगी साजो-सामान को एक ही बार में निश्चित जगहों तक पहुंचा सके. भारत के मौसम की विविधता के मद्देनजर यहां पर 50 डिग्री सेल्सियस से माइनस तक के तापमान में सैन्‍य साजो सामान पहुंचाना होता है. ऐसे में यह सबसे बेहतर विकल्‍प है. वहीं यह कई तरह के मिशन को अंजाम दे सकता है, जिसमें टैक्टिकल एयरलिफ्ट से लेकर स्पेशल ऑपरेशंस के साथ ही खुफिया एवं इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से लेकर खोज और बचाव अभियान तक शामिल हैं. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के पास करीब 12 सी-130जे विमान हैं, इनमें से 6 को 2011 में और 6 को 2017 में डिलीवर किया गया.
यह विमान 19 टन वजन उठाकर 643 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और खराब मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम है.
लॉकहीड मार्टिन भारत में उत्पादन केंद्र स्थापित कर सकता है, जो अमेरिका के बाहर इसका पहला वैश्विक केंद्र होगा.
भारतीय वायुसेना सोवियत समय के AN-32 और IL-76 विमानों को बदलने के लिए नए विमान खरीदने की योजना बना रही है.
यह विमान हर मौसम और दुर्गम इलाकों में भारी सैन्य उपकरण ले जाने और विभिन्न मिशनों के लिए उपयुक्त है.

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