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This Article is From Mar 09, 2026

दो चरण में चुनाव, दागी अधिकारियों को हटाने का आग्रह, बीजेपी ने बंगाल चुनाव के लिए EC के सामने रखी मांग

BJP Bengal Election: बीजेपी ने चुनाव आयोग से राज्य में दो चरण में चुनाव कराने की मांग की है. पार्टी ने साथ ही चुनाव से पहले ही दागी अधिकारियों को हटाने का भी आग्रह किया है.

दो चरण में चुनाव, दागी अधिकारियों को हटाने का आग्रह, बीजेपी ने बंगाल चुनाव के लिए EC के सामने रखी मांग
बंगाल बीजेपी की चुनाव आयोग से मांग
नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी की राज्य इकाई ने सोमवार को चुनाव आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है. राज्य के दौर पर आए  पूर्ण चुनाव आयोग  के सामने पेश किए गए इस प्रतिवेदन में बीजेपी ने राज्य में चुनावी हिंसा, प्रशासनिक पक्षपात और राज्य अधिकारियों की भूमिका पर गहरी चिंता व्यक्त की है. बीजेपी ने मांग की है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव सात या आठ चरणों के बजाय केवल एक या अधिकतम दो चरणों में संपन्न कराए जाने चाहिए क्योंकि लंबे चुनावी कार्यक्रम से डराने-धमकाने और हिंसा की गुंजाइश बढ़ जाती है और केंद्रीय बलों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है.

पार्टी ने उन अधिकारियों को हटाने की मांग की है जिन्हें 2019, 2021 और 2024 के चुनावों के दौरान आयोग ने पहले भी हटाया था. बीजेपी का कहना है कि जो अधिकारी पिछले चुनावों में अनुपयुक्त पाए गए, उन्हें संवेदनशील पदों पर फिर से नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए. इसके साथ ही पार्टी ने मांग की है कि पिछले तीन चुनावों में जिन मतदान केंद्रों पर हिंसा हुई या जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, उन्हें संवेदनशील घोषित किया जाए.

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती को लेकर बीजेपी ने सुझाव दिया कि सुरक्षा बलों को स्थानीय परिस्थितियों से परिचित होने के लिए काफी पहले तैनात किया जाना चाहिए. पार्टी ने यह भी कहा कि केंद्रीय बलों को राज्य पुलिस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और उनकी आवाजाही की निगरानी नोडल अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए. बीजेपी ने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में केंद्रीय बलों को स्थानीय लोगों ने आवभगत की थी, जिसे रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए जाने चाहिए.

ज्ञापन में सामान्य और पुलिस पर्यवेक्षकों की जल्द तैनाती की भी मांग की गई ताकि वे जमीनी स्थिति का स्वतंत्र मूल्यांकन कर सकें. बीजेपी ने कहा कि केंद्रीय बलों द्वारा किया जाने वाला रूट मार्च स्थानीय पुलिस के बजाय पर्यवेक्षकों के इनपुट पर आधारित होना चाहिए. इसके अलावा बड़े बहुमंजिला आवासीय परिसरों के भीतर अनिवार्य मतदान केंद्र बनाने की मांग की गई है ताकि स्थानीय पुलिस द्वारा निवासियों को मतदान से रोकने जैसी स्थिति न बने.

मतदान के दिन की व्यवस्थाओं पर बीजेपी ने दो चरणों वाली मतदाता पहचान प्रक्रिया का प्रस्ताव दिया है, जिसमें पहली जांच मतदान केंद्र के बाहर केंद्रीय बलों द्वारा और दूसरी जांच अंदर मतदान अधिकारियों द्वारा की जाए. पार्टी ने मांग की है कि मतदान केंद्रों को पूरी तरह से केंद्रीय बलों की निगरानी में रखा जाए और वहां राज्य पुलिस या किसी भी प्रकार के स्वयंसेवकों की उपस्थिति न हो. पोलिंग स्टाफ में 50 प्रतिशत राज्य और 50 प्रतिशत केंद्र सरकार के कर्मचारी होने चाहिए और संविदा कर्मचारियों या शिक्षकों की तैनाती पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए.

बीजेपी ने हर मतदान केंद्र पर वेबकैम लगाने और उम्मीदवारों को उसका लाइव एक्सेस देने की मांग की है. पार्टी ने यह भी कहा कि यदि कैमरा खराब होता है तो मतदान रोककर दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए. मतगणना के लिए पार्टी ने मांग की है कि यह प्रक्रिया केवल जिला और उप-मंडल मुख्यालयों में केंद्रीय बलों की देखरेख में केंद्र और राज्य के अधिकारियों की समान भागीदारी के साथ संपन्न हो.

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