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This Article is From Sep 08, 2025

बिहार वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन मामले में आज नजरें सुप्रीम कोर्ट पर, कसौटी पर होंगे राज्य के आंकड़े

चुनाव आयोग ने बताया था कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.5 प्रतिशत ने एसआईआर प्रक्रिया में अपनी पात्रता के दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं.

बिहार वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन मामले में आज नजरें सुप्रीम कोर्ट पर, कसौटी पर होंगे राज्य के आंकड़े
  • बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल रिवीजन (SIR) के खिलाफ याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.
  • आयोग के मुताबिक, मसौदा लिस्ट में 7.24 करोड़ वोटरों में से 99.5% ने SIR में पात्रता दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं.
  • अदालत ने कानूनी सहायकों द्वारा जिला जजों को गोपनीय रिपोर्ट सौंपने और राज्य के आंकड़ों पर विचार की बात कही थी.
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बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ राजनीतिक दलों और अन्य की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अब से कुछ देर में सुनवाई करने वाला है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच निर्वाचन आयोग की टिप्पणी पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और अन्य याचिकाकर्ताओं के जवाब पर विचार करेगी. 

निर्वाचन आयोग ने 24 जून को राज्य की मतदाता सूचियों का स्पेशल रिवीजन का का निर्देश दिया था. आयोग ने कहा है कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.5 प्रतिशत ने एसआईआर प्रक्रिया में अपनी पात्रता के दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं.

इस मामले को लेकर कई एनजीओ, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों की तरफ से याचिकाएं दायर की गई हैं. कुछ अन्य याचिकाएं भी हैं. सुप्रीम कोर्ट 22 अगस्त से इन पर सुनवाई कर रहा है.

अदालत ने कहा था कि कानूनी सहायक संबंधित जिला जजों को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपेंगे और राज्य में जुटाए गए आंकड़ों पर 8 सितंबर को विचार किया जाएगा. अदालत ने निर्वाचन आयोग की टिप्पणी पर राजनीतिक दलों से अपना जवाब दाखिल करने को भी कहा था.

पिछली सुनवाई के दौरान बेंच ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि वह बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के मसौदा मतदाता सूची से छूट गए वोटरों को भौतिक रूप से अपना दावा पेश करने के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी अर्जी देने का विकल्प दे.

स्पेशल रिवीजन की समय सीमा बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा दायर कुछ आवेदनों पर शीर्ष अदालत ने 1 सितंबर को सुनवाई की थी. उस दौरान निर्वाचन आयोग ने बताया था कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत बिहार में तैयार किए गए मसौदा मतदाता सूची में दावे, आपत्तियां और सुधार के लिए आवेदन 1 सितंबर के बाद भी दिये जा सकते हैं

आयोग ने हालांकि कहा था कि इन आवेदनों पर विचार मतदाता सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद विचार किया जाएगा. आयोग ने ये भी कहा था कि मसौदा मतदाता सूची में दावे और आपत्तियां प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नामांकन फॉर्म की अंतिम तिथि तक दाखिल की जा सकती हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर पर भ्रम को बड़े पैमाने पर विश्वास का मुद्दा बताया था और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वह 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने में मतदाताओं और दलों की सहायता के लिए कानूनी स्वयंसेवकों को तैनात करे.

निर्वाचन आयोग ने एसआईआर अनुसूची के अनुसार दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए 1 सितंबर की समय सीमा को आगे बढ़ाने का विरोध किया था. आयोग ने कहा था कि शीर्ष अदालत के 22 अगस्त के आदेश के बाद 30 अगस्त तक केवल 22,723 दावे शामिल करने के लिए दायर किए गए थे और 1,34,738 आपत्तियां बाहर करने के लिए दायर की गई थीं.

बिहार एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग की 24 जून की अनुसूची के अनुसार, मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 1 सितंबर को समाप्त हो गई है. अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जानी है.

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