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विजय मिश्रा के बहाने योगी पर वार,क्या खुशी दुबे वाली गलती दोहरा रहा विपक्ष? पूरी बात समझिए

Vijay Mishra UP News: भदोही के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा के बहाने विपक्ष 2027 चुनाव के लिए अपनी सियासी पिच तैयार करने में जुटा है. विपक्ष एक नैरेटिव सेट करने की कोशिश में है कि योगी सरकार जानबूझकर ब्राह्मणों को निशाना बना रही है पर इससे कहीं वह खुशी दुबे वाली गलती तो दोहरा रहा है?

विजय मिश्रा के बहाने योगी पर वार,क्या खुशी दुबे वाली गलती दोहरा रहा विपक्ष? पूरी बात समझिए
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  • भदोही की एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व विधायक विजय मिश्रा और उनके परिवार को आपराधिक मामलों में सजा सुनाई है
  • विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामलली मिश्र और बेटे विष्णु मिश्र को दस वर्ष का कठोर कारावास दिया गया है
  • विपक्ष योगी सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगा रहा है जबकि सरकार ने कोर्ट के फैसले को मान्यता दी है
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नई दिल्ली:

बाहुबली विधायक विजय मिश्रा और उनके परिवार को भदोही की एमपी-एमएलए कोर्ट ने सजा क्या सुनाई,यूपी की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है. न्यायालय ने पूर्व विधायक विजय मिश्र,उनकी पत्नी व पूर्व एमएलसी रामलली मिश्र और उनके बेटे विष्णु मिश्र को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. वहीं,उनकी बहू रूपा मिश्र को 4 वर्ष के कारावास की सजा दी गई है.विपक्ष इसे लेकर सत्तारूढ़ योगी सरकार पर निशाना साधते हुए उसे ब्राह्मण विरोधी ठहराने में जुटी है जबकि योगी सरकार इसे आपराधिक मामलों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर कोर्ट का फैसला बता रही है. अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव हैं और उससे पहले विजय मिश्रा पर विपक्ष वही नैरेटिव बनाने की कोशिश में जुटा है जैसा उसने बिकरू कांड में गिरफ्तार खुशबू दुबे के मामले में बनाया था.ये अलग बात है कि तब उसे इसका कोई सीधा फायदा नहीं मिला था. 

सबसे पहले जानिए कौन हैं विजय मिश्रा और उनके साथ क्या हुआ

विजय मिश्र का भदोही ज‍िले की ज्ञानपुर सीट पर दो दशकों तक कब्जा रहा है. वे 2002 से 2017 तक लगातार चार बार विधायक रहे. 2022 के यूपी व‍िधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने उनका टिकट काटकर विपुल दुबे को प्रत्याशी बनाया. विजय मिश्र तब प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ तीसरे स्थान पर रहे. मिश्रा को एक हफ्ते में दो बड़े झटके लगे हैं. एक तो उन्हें बीते बुधवार 46 साल पुराने यानी साल 1980 के प्रकाश नारायण हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. वहीं रिश्तेदार की संपत्ति हड़पने के जुर्म में 10-10 साल की सजा सुनाई है. इस केस में तो विजय मिश्रा के अलावा उनकी पत्नी रामलली मिश्रा और बेटा विष्णु मिश्रा को 10 साल तो बहू रूपा को 4 साल की सजा सुनाई गई है. विजय मिश्रा पर कुल 83 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. योगी सरकार के गैंगस्टर एक्ट के तहत उनकी अरबों रुपये की बेनामी संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं.

अब खुशी दुबे वाला मामला भी समझ लीजिए 

6 साल पहले जुलाई 2020 के बिकरू कांड में कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी. यूपी की राजनीति में इस घटना पर खूब बवाल कटा था. सीएम योगी की अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति को भी ये सीधी चुनौती थी. हालांकि विकास दुबे और उसका बॉडीगार्ड अमर दुबे अलग-अलग एनकाउंटर में ढेर कर दिए गए. इसी केस में अमर दुबे की नवविवाहिता पत्नी खुशी दुबे को पुलिस ने सह-आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था. खुशी को जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.

खुशी पर क्यों हुई थी राजनीति?

कांग्रेस, सपा और बसपा ने खुशी दुबे के मुद्दे को लपकते हुए आरोप लगाया था कि एक बेकसूर नवविवाहिता को सिर्फ 'ब्राह्मण' होने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है.विपक्ष का तर्क था कि एक नवविवाहित लड़की, जिसका अपराध से कोई सीधा लेना-देना नहीं था, उसे सिर्फ इसलिए जेल में रखा गया क्योंकि वह ब्राह्मण समुदाय से आती थी.दूसरी ओर सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वयं एक कार्यक्रम में खुशी दुबे और ब्राह्मणों की नाराजगी के सवाल पर दो टूक कहा था कि कानून सबके लिए बराबर है.क्या मारे गए पुलिसकर्मी (डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा) ब्राह्मण नहीं थे? 

दरअसल जुलाई 2020 में खुशी गिरफ्तार हुई थी और 2022 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने थे.जाहिर है ब्राह्मण वोटों के जातिगत ध्रुवीकरण के लिए विपक्ष को इस मुद्दे में काफी दम दिखा.यहां तक कि खुशी दुबे की मां को कांग्रेस ने टिकट भी दिया.बाद में तकनीकी दिक्कतों के चलते कानपुर में खुशी की बहन चुनाव लड़ी ये अलग बात है कि जनता ने इस मुद्दे पर नकार दिया.खुशी की बहन की तो जमानत भी नहीं बची.

फिर जाति वाला कार्ड खेलना चाहता है विपक्ष

2022 में बीजेपी की लगातार दूसरी बार सरकार बनी. 2027 से पहले अब विपक्ष फिर जाति वाला कार्ड खेलना चाहता है. विपक्ष के लिए 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे भी संजीवनी से कम नहीं हैं. 2024 में 80 लोकसभा सीटों में विपक्ष को कुल 43 सीटें मिली थीं जिसमें कांग्रेस को 6 और सपा के खाते में 37 सीटें आई थीं. तब बीजेपी को मात्र 33 सीटें मिली थीं और गठबंधन को कुल 36 सीटें आई थीं. हालांकि विधानसभा चुनाव में विजय मिश्र के बहाने विपक्ष के ब्राह्मण कार्ड को जानकार खुशी दुबे वाली गलती ही करार दे रहे हैं. 

दरअसल योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी राजनीतिक यूएसपी  उनकी 'कड़क कानून-व्यवस्था' और 'अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस' रही है.जब विपक्ष विजय मिश्रा या विकास दुबे जैसे चेहरों के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है, तो जनता के बीच मैसेज जाता है कि विपक्ष माफियाओं और अपराधियों का सरपरस्त है. इससे पहले बुलडोजर एक्शन को लेकर भी योगी सरकार को ऐसे ही घेरा गया लेकिन जनता ने न सिर्फ यूपी में बल्कि दूसरे राज्यों में भी भरपूर समर्थन दिया और अब दूसरी सरकारें भी इसे जोर शोर से अपना रही हैं.
 

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