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Exclusive: क्या राम मंदिर में 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस सुरक्षित है? दान देने वाले पूर्व केंद्रीय गृह सचिव ने जताई चिंता

दान करने वाले लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि रामचरितमानस को शुरू में मंदिर में प्रदर्शित किया गया था और भक्त इसे देख सकते थे. रोजाना इसकी पूजा होती थी. मैं बहुत खुश था, लेकिन अचानक इसे हटा दिया गया.

Exclusive: क्या राम मंदिर में 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस सुरक्षित है? दान देने वाले पूर्व केंद्रीय गृह सचिव ने जताई चिंता
  • पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन ने राम मंदिर को लगभग 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस दान की थी
  • रामचरितमानस को मंदिर में पांच महीने के लिए प्रदर्शित किया गया था, फिर उसे वहां से हटा दिया गया
  • दान देने वाले लक्ष्मीनारायणन ने मंदिर प्रशासन और सरकार से दान की सुरक्षा और पारदर्शिता की मांग की है

अयोध्या राम मंदिर से जुड़े डोनेशन स्कैम के मामले ने श्रद्धालुओं को हिलाकर रख दिया है. पुलिस इसकी जांच कर रही है. इस बीच, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन ने NDTV को बताया कि अब लोग उनसे, उनके दान किए गए सोने की रामचरितमानस के सुरक्षित होने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में उनके मन में भी पश्न खड़ा हो रहा है. एस. लक्ष्मीनारायणन ने मंदिर को लगभग 5 करोड़ रुपये की सोने की परत वाली रामचरितमानस दान की थी.

NDTV के ऐश्वर्या जैन के साथ एक इंटरव्यू में, पूर्व नौकरशाह ने कहा कि उन्हें सवाल पूछने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि लोग उनसे पूछ रहे थे कि रामलला को दान की गई रामचरितमानस सुरक्षित है या नहीं?

लक्ष्मीनारायणन का कहना है कि हालांकि शुरुआत में कुछ समय के लिए रामचरितमानस को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था, लेकिन अब उसे वहां से हटा दिया गया है. मंदिर प्रशासन से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगने की बार-बार कोशिशों के बावजूद, अब तक इस संबंध में कोई जवाब नहीं आया है.

भक्ति से दिए उपहार

पूर्व गृह सचिव का कहना है कि सोने की परत वाली रामचरितमानस सिर्फ़ एक उपहार नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार की एक लंबी आध्यात्मिक यात्रा का नतीजा है. उन्होंने कहा, "रामचरितमानस मेरी दिवंगत मां की भक्ति का खज़ाना थी. उन्होंने अपने जीवन के लगभग 15 से 18 साल भगवान राम का नाम लिखने में बिताए. मेरा परिवार कई दशकों से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा है. आंदोलन के लिए कन्याकुमारी से भेजी गई पहली ईंट मेरे ससुर के घर से आई थी. हम भगवान राम को मानने वाले परिवार हैं."

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रिटायरमेंट मिलने पर भगवान का शुक्रगुजार महसूस करते हुए, वे कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें लगा कि अब अपनी कमाई का कुछ हिस्सा रामलला को समर्पित करने का समय आ गया है. सरकारी पेंशन मेरी ज़रूरतों के लिए काफ़ी है. मैं बहुत सादा जीवन जीता हूं. मुझे लगा कि भगवान ने मुझे जो भी धन दिया है, वह उनकी सेवा में ही लगना चाहिए.

लक्ष्मी नारायणन और उनकी पत्नी सरस्वती ने राम मंदिर को जो सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस दान की है, उसकी कीमत लगभग 4.5 करोड़ से 5 करोड़ रुपये है. यह पांडुलिपि सोने, चांदी और तांबे से बनी है और इसका वज़न लगभग 147 किलोग्राम है. इसमें सोने की परत चढ़े 522 पन्ने हैं, जिन पर गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के सभी 10,902 श्लोक लिखे हैं. इसे अप्रैल 2024 में राम मंदिर ट्रस्ट को भेंट किया गया था. NDTV के पास इस जोड़े द्वारा भेंट की गई रामचरितमानस की तस्वीरें हैं.

लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि रामचरितमानस को शुरू में मंदिर में प्रदर्शित किया गया था और भक्त इसे देख सकते थे. रोजाना इसकी पूजा होती थी और लोग इसे देखते थे. मैं बहुत खुश था, लेकिन अचानक इसे हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि शुरू में आश्वासन दिया गया कि इसे गर्भगृह के पास रखा जाएगा. बाद में कहा गया कि इसे वहां नहीं रखा जा सकता, कहीं और रखा जाएगा. आख़िरकार, वे वादे भी पूरे नहीं किए गए. वे कहते हैं कि वहां से हटाए जाने से पहले यह पांडुलिपि लगभग पांच महीनों तक प्रदर्शित की गई थी.

उन्होंने कहा कि मैंने कई बार चक्कर लगाए. हर बार संबंधित लोगों से मिलना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो गया. मैंने स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. यह दावा करते हुए कि वे किसी तरह की पहचान या शोहरत नहीं चाहते, वे कहते हैं कि वे बस इस प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं क्योंकि यह आस्था का दान है.

उनका कहना है कि लोग मुझसे पूछने लगे हैं कि मेरा तोहफा सुरक्षित है या नहीं? उन्होंने कहा कि घोटाले की खबर मीडिया में आने के बाद मामला एक अलग मोड़ पर आ गया है. लोग मुझसे पूछने लगे कि मेरी रामचरितमानस सुरक्षित है या नहीं. इससे मुझे सच में बहुत परेशानी हुई.

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पूर्व नौकरशाह का कहना है कि इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, यूपी सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों से संपर्क किया. मेरी गुज़ारिश बहुत सीधी-सादी थी. ऑडिट करवाइए. पता लगाइए कि चढ़ावा कहां है और क्या हर चीज़ का सही हिसाब-किताब रखा गया है या नहीं.

RSS के सामने उठाया मामला

पूर्व नौकरशाह का कहना है कि जब स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की उनकी कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकला, तो RSS के कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें यह मामला ऊपर के स्तर पर उठाने की सलाह दी. वे बताते हैं कि हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत के साथ उनकी मुलाकात करवाई गई.

लक्ष्मीनारायणन कहते हैं, "वे बहुत विनम्र थे और उन्होंने मेरी बातों को ध्यान से सुना. उन्होंने मेरी श्रद्धा की तारीफ़ की और वादा किया कि वे हर तरह से मेरी मदद करेंगे." हालांकि, कई बार फ़ॉलो-अप करने के बावजूद अब तक कोई प्रगति न होने की बात कहते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने कई बार इस मुद्दे को उठाने में मेरी मदद की, उनका कहना है कि उनकी चिंताओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि इस घोटाले को पूरी तरह से टाला जा सकता था. ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था. जिन लोगों को मंदिर के मैनेजमेंट की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, उनकी यह ज़िम्मेदारी है कि वे कड़ी निगरानी रखें. वे निगरानी में पूरी तरह से नाकाम रहे.

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के हटने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नैतिक ज़िम्मेदारी के अलावा, निगरानी की भी ज़िम्मेदारी होती है. जब किसी की देखरेख में ऐसी घटना होती है, तो जवाबदेही ज़रूरी हो जाती है. भक्त न्याय चाहते हैं. इस मामले की पूरी जांच की हालिया मांग का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, "भगवान राम हम सभी के हैं. लोगों ने आस्था और भावनाओं के साथ मंदिर में दान दिया. ट्रस्ट पर भरोसा तभी बहाल होगा जब ज़िम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी."

उनके अनुसार, इस पूरे घोटाले ने उन कई भक्तों को बहुत परेशान किया है जिन्होंने यह सोचकर राम मंदिर में दान दिया था कि उनका चढ़ावा सुरक्षित रहेगा. उन्होंने कहा कि मेरी एकमात्र मांग पारदर्शिता और जवाबदेही है. राम मंदिर मेरे परिवार का जीवनभर का सपना रहा है.

वे आगे कहते हैं कि उन्होंने सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस के बारे में बार-बार जानकारी मांगी है और चाहते हैं कि इसे उसी जगह वापस रखा जाए जहां इसे शुरू में रखा गया था. लक्ष्मीनारायणन ने कहा मैंने इसे भक्ति भाव से भेंट किया था. मैं बस यह जानना चाहता हूं कि क्या हुआ है और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि भक्तों के चढ़ावे का सही हिसाब-किताब रखा जाए.

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