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This Article is From Aug 11, 2017

अनुवाद पर अटकी अयोध्‍या केस की सुनवाई, 5 दिसंबर को अगली सुनवाई

इसके लिए तीन महीने का समय कोर्ट ने दिया है. इस मामले में सबसे पहले सिविल सूट की अर्जियों पर सुनवाई होगी.

अनुवाद पर अटकी अयोध्‍या केस की सुनवाई, 5 दिसंबर को अगली सुनवाई
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
  • अयोध्‍या केस में छह वर्षों बाद हुई सुनवाई
  • इससे पहले 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्णय आया
  • अभी आठ भाषाओं में संबंधित कागजात हैं
नई दिल्‍ली: अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की अगली सुनवाई अब पांच दिसंबर को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि पहले आठ भाषाओं में मौजूद संबंधित कागजातों का अंग्रेजी में अनुवाद होना चाहिए. इसके लिए तीन महीने का समय कोर्ट ने दिया है. इस मामले में सबसे पहले सिविल सूट की अर्जियों पर सुनवाई होगी. इससे पहले करीब 20 याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले से जुड़े पक्षकारों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सारे पक्षों में जमकर गहमागहमी चली. कपिल सिब्बल समेत सारे वकील चिल्लाते नजर आए. इसे देखकर जस्टिस अशोक भूषण को अपना माइक ऑन करके कहना पड़ा कि वो सारे पक्षों की बात सुनेंगे. कागजातों के अनुवाद के लिए पर्याप्त वक्त दिया जाएगा. इसके बाद ही सुनवाई होगी.

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर दाखिल करीब 20 याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले से जुड़े पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. 6 वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करने जा रहा है.

6 वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई. जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच इस मामले की सुनवाई हुई. दरअसल कुछ दिन पहले ही CJI खेहर ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी के जल्द सुनवाई के अनुरोध पर कहा था कि वो सोच रहे हैं कि जल्द सुनवाई के लिए बेंच का गठन कर दिया जाए.

पढ़ें: अयोध्‍या केस: शिया वक्‍फ बोर्ड ने कहा-मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई, याचिका पर SC में सुनवाई

मध्‍यस्‍थता की पेशकश
इससे पहले कोर्ट ने सलाह दी थी कि सभी पक्षों को आपसी सहमति से मसले का हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि ऐसी स्थिति में मध्यस्थता के लिए किसी जज की नियुक्ति की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संवेदनशील और आस्था से जुड़ा बताते हुए पक्षकारों से बातचीत के जरिये आपसी सहमति से मसले का हल निकालने को कहा था.

पढ़ें: अयोध्या मामला : शिया बोर्ड ने कहा - विवादित जगह से दूर बनाई जा सकती है मस्जिद

VIDEO: शिया बोर्ड ने कोर्ट में रखी दलील


इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
कोर्ट का यह रुख इसलिए अहम है क्योंकि एक बड़ा वर्ग इसे बातचीत और सामंजस्य से ही सुलझाने की बात करता रहा है. गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने साल 2010 में विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश दिया था.
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