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खामेनेई की मौत पर देशभर में प्रदर्शन, कश्मीर, लखनऊ और पटना में शिया समुदाय सड़कों पर, कहां कैसा हाल

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद देशभर में शिया समुदाय सड़कों पर उतर आया है. कश्मीर, लखनऊ और पटना में विरोध प्रदर्शन हुए, जबकि राजस्थान में भी शिया समुदाय ग़मज़दा है। राजस्थान शिया मुस्लिम महासभा ने तीन दिन का शोक घोषित किया है और कहा है कि धार्मिक अनुष्ठानों के ज़रिए खामेनेई को श्रद्धांजलि दी जाएगी. समुदाय आज रात कैंडल मार्च भी निकालेगा.

खामेनेई की मौत पर देशभर में प्रदर्शन, कश्मीर, लखनऊ और पटना में शिया समुदाय सड़कों पर, कहां कैसा हाल
खामेनेई की मौत देशभर में प्रदर्शन
  • इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई हिस्सों में प्रदर्शन
  • कश्मीर के कई इलाकों में खामेनेई की मौत पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए
  • जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर ने शांति बनाए रखने की अपील की और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया
श्रीनगर/लखनऊ:

इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत होने के बाद कश्मीर से लेकर कर्नाटक तक, भारत के विभिन्न हिस्सों में शिया समुदाय के लोग रविवार के दिन सड़कों पर उतर आए और उन्होंने इस घटनाक्रम पर आक्रोश एवं दुख व्यक्त किया. इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों के दौरान खामेनेई की शनिवार को तेहरान में एक हवाई हमले में मौत हो गई थी. ईरानी सरकारी मीडिया ने रविवार को इसकी पुष्टि की, जिसके बाद भारत समेत दुनिया भर में विरोध-प्रदर्शन एवं मातम की लहर शुरू हो गई.

खामेनेई की मौत पर कश्मीर में प्रदर्शन

इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि खामेनेई की मौत पर कश्मीर के लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए. कश्मीर में करीब 15 लाख शिया हैं. प्रदर्शनकारियों को अपना सीना पीटते और अमेरिका एवं इजराइल के खिलाफ नारे लगाते देखा गया. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरान में जारी घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई और व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच शांति बनाए रखने की अपील की.

मुख्यमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों समेत ईरान में सामने आ रहे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने सभी समुदायों से शांत रहने, शांति बनाए रखने और ऐसे किसी भी कदम से बचने की अपील की है, जिससे तनाव या अशांति पैदा हो सकती है.''

अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार ईरान में मौजूद छात्रों सहित जम्मू कश्मीर के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय में है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी खामेनेई की मौत पर ‘गहरा दुख' व्यक्त किया. सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने यहां जारी एक बयान में कहा, ‘‘अब्दुल्ला ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है और इसे एक दुखद एवं अस्थिर करने वाला ऐसा घटनाक्रम बताया जिसका क्षेत्र की शांति और स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा.''

पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने की शांति की अपील

पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने शांति की अपील की और प्रशासन से स्थिति को संवेदनशीलता एवं विवेक के साथ संभालने का आग्रह किया. उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि जो लोग शोक मनाना चाहते हैं, वे बिना किसी डर या अनुचित प्रतिबंध के सम्मानपूर्वक ऐसा कर सकें. कश्मीर के मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि खामेनेई के मारे जाने से वह बहुत दुखी और आक्रोशित हैं.

मीरवाइज ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की क्रूर हत्या से अत्यंत दुखी एवं आक्रोशित हूं. इस घटना ने मुस्लिम जगत को झकझोर दिया है। जम्मू कश्मीर के लोग इस क्रूरता और ईरान के खिलाफ जारी आक्रमण की तथा मिनाब में निर्दोष छात्राओं के कत्लेआम की सामूहिक रूप से निंदा करते हैं.'' देश भर के कई मुस्लिम निकायों और संगठनों ने ईरानी नेता की याद में कई दिन के शोक की घोषणा की और सोमवार को भी विरोध-प्रदर्शन करने का कार्यक्रम तय किया.

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद देशभर में शिया समुदाय सड़कों पर उतर आया है. कश्मीर, लखनऊ और पटना में विरोध प्रदर्शन हुए, जबकि राजस्थान में भी शिया समुदाय गमजदा नजर आ रहा है. राजस्थाी शिया मुस्लिम महासभा ने तीन दिन का शोक घोषित किया है और कहा है कि धार्मिक अनुष्ठानों के ज़रिए खामेनेई को श्रद्धांजलि दी जाएगी. समुदाय आज रात कैंडल मार्च भी निकालेगा.

लखनऊ में भी प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा मस्जिद के पास बड़ी संख्या में लोग जुटे और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए तथा शोकाकुल महिलाएं ईरानी नेता की तस्वीर से लिपटकर रोती दिखीं. अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने घोषणा की कि सोमवार को विरोध-प्रदर्शन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले फूंके जाएंगे. अब्बास ने कहा कि शिया समुदाय ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है और इस दौरान लोग काले कपड़े पहनेंगे, अपने घरों पर काले झंडे लगाएंगे तथा शोक सभाएं करेंगे.

पंजाब में भी लोगों का प्रदर्शन

पंजाब में मुस्लिम आबादी बहुत कम है लेकिन उसके शहर लुधियाना में भी विरोध-प्रदर्शन किए जाने और पुतले फूंके जाने की घटनाएं सामने आईं. विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने मांग की कि केंद्र सरकार एक सप्ताह के राष्ट्रीय शोक की घोषणा करे. रहमानी ने दुनिया भर के मुसलमानों से ऐसी चुनौतियों के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया. उन्होंने खामेनेई को महान शहीद बताते हुए उनकी मौत की कड़े शब्दों में निंदा की.

अजमेर में शोक की घोषणा

अजमेर में भी शिया समुदाय ने खामेनेई के मारे जाने पर तीन दिन का शोक मनाए जाने की घोषणा की. समुदाय के नेता सैयद आसिफ अली ने यह घोषणा करते हुए शिया समुदाय के सदस्यों से अपील की कि वे शोक मनाएं और इस अवधि के दौरान जश्न मनाने से परहेज करें. अजमेर के दोराई और तारागढ़ में दरगाह पर भी शोक सभाएं आयोजित की गईं, जहां समुदाय के सदस्यों ने प्रार्थना की और घटना पर दुख व्यक्त किया. इसी बीच, दुबई और अबू धाबी के पास हमलों के बाद उड़ानें रद्द होने से जोधपुर के कई श्रद्धालु दुबई में फंसे हुए हैं.

दिल्ली, बिहार, झारखंड और तेलंगाना में प्रदर्शन

नयी दिल्ली, बिहार, झारखंड और तेलंगाना में भी शोक मनाए जाने और नारेबाजी किए जाने के दृश्य देखे गए, जहां खामेनेई के पोस्टर थामे प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइली सैन्य कार्रवाइयों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में, जहां खामेनेई कभी गए थे, लोगों ने मौन रखा और दुकानें एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद रखे गए. ग्रामीणों ने शिया सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि के तौर पर तीन दिन के शोक की घोषणा की. गांव में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए सभी समारोह एवं सार्वजनिक कार्यक्रम निलंबित कर दिए गए हैं. ग्रामीणों के अनुसार, अली खामेनेई 1986 में अलीपुरा आए थे.

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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पीयूष जयजान
Sub Editor
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