असम में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है लेकिन पीछे छूटी तबाही की तस्वीरें दिल झकझोर देने वाली हैं. NDTV जब शिवसागर जिले के सबसे ज्यादा प्रभावित नेपालीखुटी गांव पहुंचा तो वहां का मंजर किसी दर्दनाक कहानी से कम नहीं था. गांव की गलियों में कीचड़ फैला हुआ है. लोगों के घरों का सामान सड़कों पर बिखरा पड़ा है और हर तरफ नुकसान के निशान दिखाई दे रहे हैं.
सड़क पर बिस्तर, कीचड़ में दबे खिलौने
गांव में कई जगह ऐसे बिस्तर और रजाइयां दिखाई दीं जो अब रहने लायक नहीं बची हैं. तस्वीरों में घरों से निकाला गया फर्नीचर सड़क किनारे पड़ा दिखा. बच्चों के खिलौने कीचड़ से सने हुए मिले मानो बाढ़ ने उनके बचपन की खुशियां भी बहा दी हों. एक जगह मिट्टी में धंसी कार खड़ी दिखाई दी जो इस बात की गवाही दे रही थी कि पानी कितनी ऊंचाई तक पहुंच गया था.

बाढ़ के बाद सड़कों पर दिखा सामान.
एक भी घर पूरी तरह सुरक्षित नहीं बचा
स्थानीय लोगों के मुताबिक नेपालीखुटी गांव बाढ़ की सबसे बड़ी मार झेलने वाले इलाकों में शामिल है. कई घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. कुछ परिवारों ने अपना लगभग पूरा सामान खो दिया. इलाके में लोगों की मौतें भी हुई हैं जबकि कई लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आ रही है. सबसे दुखद बात यह रही कि बचाव दल एक सप्ताह तक गांव तक नहीं पहुंच सका.

असम में बाढ़ का कहर
अब आगे आ रहे हैं मददगार हाथ
हालात में थोड़ा सुधार होने के बाद अब अलग-अलग जिलों से लोग राहत सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं. NDTV को 40 लोगों का एक समूह मिला जो लखीमपुर से नेपालीखुटी गांव आया था. इस समूह ने सूखा राशन बांटने के बजाय पका हुआ भोजन पहुंचाने का फैसला किया ताकि प्रभावित परिवारों को तुरंत मदद मिल सके.

खाने के लिए तरस रहे लोग.
75 पहुंचा मौतों का आंकड़ा
असम में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है. पिछले 24 घंटों में शिवसागर जिले में डूबने से सात और लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही राज्य में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है. शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप महानगर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं. हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी जलमग्न है. इस बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मृतकों के परिजनों, छात्रों और गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत और पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है. हालांकि नेपालीखुटी गांव की टूटी जिंदगी को फिर से पटरी पर आने में अभी लंबा समय लग सकता है.

गांव में एक भी पक्का घर नहीं बचा.
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