सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पहली बार स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरकर उसकी युद्धक क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव लिया. बेंगलुरु स्थित एचएएल परिसर में हुए इस दौरे के दौरान उन्होंने भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस ताकत और सैन्य तैयारियों का जायजा लिया.
यह दौरा भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाता है. सेना प्रमुख ने इस दौरान एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड सहित कई प्लेटफॉर्म्स का निरीक्षण किया. साथ ही उन्होंने हेलीकॉप्टरों के अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस सिस्टम की जानकारी भी ली.
प्रचंड भारत का पहला स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर
लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरकर जनरल द्विवेदी ने इसकी सामरिक क्षमताओं को करीब से परखा. प्रचंड भारत का पहला स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर है, जो ऊंचे और दुर्गम इलाकों में भी प्रभावी ढंग से ऑपरेट कर सकता है. यह 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है और पहले ही थल सेना व वायु सेना में शामिल हो चुका है.

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आधुनिक एवियोनिक्स, सटीक हथियार प्रणालियों और मल्टी-रोल क्षमताओं से लैस प्रचंड दुश्मन के टैंकों पर हमला, नजदीकी हवाई समर्थन और निगरानी जैसे अहम युद्धक कार्य कर सकता है.
सेना हवा और जमीन दोनों में प्रभाव डालने के लिए तैयार
बदलते युद्ध परिदृश्य में, जहां ड्रोन और लो-एल्टीट्यूड एयरस्पेस की भूमिका बढ़ती जा रही है, वहां प्रचंड जैसे प्लेटफॉर्म जमीन और हवा दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना को निर्णायक बढ़त देते हैं.
सेना प्रमुख की यह उड़ान न सिर्फ तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारतीय सेना नई सोच, स्वदेशी तकनीक और मजबूत नेतृत्व के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है.
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