- केंद्र सरकार ने उर्वरक उत्पादन क्षेत्र को प्राकृतिक गैस आपूर्ति की प्राथमिकता सूची में शामिल कर दिया है.
- नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर 2026 के तहत उर्वरक संयंत्रों को कम से कम 70% गैस आपूर्ति अनिवार्य की गई है.
- भारत के पास खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों का स्टॉक पिछले साल की तुलना में अधिक और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.
मिडिल ईस्ट में जारी संकट और वैश्विक गैस आपूर्ति पर बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारत में उर्वरक उत्पादन को सुरक्षित करने के लिए एक अहम कदम उठाया है. सरकार ने उर्वरक उत्पादन क्षेत्र को प्राकृतिक गैस आपूर्ति की प्राथमिकता सूची में शामिल कर दिया है, ताकि गैस की संभावित कमी का असर किसानों पर न पड़े.
इसके लिए सरकार ने नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर 2026 जारी किया है. इस आदेश के तहत उर्वरक क्षेत्र को औपचारिक रूप से प्राथमिकता सूची में शामिल करते हुए प्रायोरिटी सेक्टर-2 श्रेणी में रखा गया है. इसका सीधा मतलब है कि देश के फर्टिलाइज़र प्लांट्स को गैस आपूर्ति बिना बाधा जारी रहेगी.
70% गैस आपूर्ति जरूरी
नए आदेश के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर कम से कम 70% प्राकृतिक गैस आपूर्ति अनिवार्य रूप से की जाएगी. यह प्रावधान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में एलएनजी की उपलब्धता अनिश्चित बनी हुई है.
यह भी पढ़ें- भारत को गैस खपत कम करनी होगी, पावर सेक्टर में कोयले का यूज बढ़ेगा...मिडिल ईस्ट संकट पर एक्सपर्ट की सलाह
उर्वरक स्टॉक पर्याप्त, घबराने की जरूरत नहीं
सरकारी सूत्रों ने आश्वस्त किया है कि भारत के पास उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. खरीफ सीजन से पहले यूरिया का स्टॉक पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर बताया गया है. खरीफ की आधी से अधिक बुवाई की जरूरत पूरा करने लायक उर्वरक पहले से उपलब्ध है. यह तैयारी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति संकट के संभावित खतरों को देखते हुए की गई है.
उच्च स्तरीय बैठक में बनी रणनीति
मंगलवार को उर्वरक विभाग में हुई उच्च स्तरीय बैठक में सभी प्रमुख उर्वरक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. बैठक में कंपनियों ने अपनी तैयारियों और चुनौतियों की जानकारी दी. मंत्रालय ने सभी संयंत्रों को निरंतर चालू रखने के निर्देश दिए. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे.
नियमों में बदलाव: घरेलू खपत और परिवहन को प्राथमिकता
सरकार ने गैस आपूर्ति संबंधी नए नियम लागू किए हैं, जिनमें घरेलू उपभोक्ता, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी गई है. इसके साथ ही औद्योगिक व व्यावसायिक क्षेत्रों में सीमित कटौती का फैसला किया गया है, ताकि आवश्यक क्षेत्रों पर कोई असर न पड़े.
भारतीय भंडार में रिकॉर्ड वृद्धि
उर्वरक विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ से पहले भारत का कुल उर्वरक स्टॉक 180.12 लाख मीट्रिक टन (LMT) तक पहुंच गया है. यह आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि के 131.79 LMT की तुलना में 36.6% अधिक है.
यह भी पढ़ें- लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर किरेन रिजिजू का कड़ा रुख, बोले-पछताएगी कांग्रेस
सबसे बड़ी वृद्धि हुई-
DAP में: 25.17 LMT
NPKS में: 56.30 LMT
यूरिया की उपलब्धता भी बढ़कर 61.51 LMT हो गई है.
आयात और शिपमेंट की अग्रिम व्यवस्था
भारत सरकार ने फरवरी 2026 तक 98 LMT यूरिया का आयात किया. अगले तीन महीनों के लिए 17 LMT अतिरिक्त खेप पाइपलाइन में है. यह सुनिश्चित करता है कि वैश्विक लॉजिस्टिक्स में बाधाएं आने पर भी किसानों को उर्वरकों की कोई कमी न हो.
सरकार के इन त्वरित और रणनीतिक कदमों का उद्देश्य स्पष्ट है कि किसानों को समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराना और खरीफ बुवाई पर किसी भी विदेशी संकट का प्रभाव न पड़ने देना. मिडिल ईस्ट की अस्थिरता से उत्पन्न चुनौतियों के बीच भारत ने उर्वरक आपूर्ति को लेकर मजबूत तैयारी कर ली है, जिससे कृषि गतिविधियां बिना रुकावट जारी रह सकेंगी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं