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तमिलनाडु चुनावों के मद्देनजर दिनाकरण दोबारा NDA में लौटे

टीटीवी दिनाकरन की एनडीए में आधिकारिक वापसी ने तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. BJP-AMMK की पुन: साझेदारी को दक्षिण भारत में भाजपा की रणनीति को मजबूत करने वाला कदम बताया जा रहा है.

तमिलनाडु चुनावों के मद्देनजर दिनाकरण दोबारा NDA में लौटे
  • टीटीवी दिनाकरन ने लंबे अटकलों के बाद एनडीए में वापसी की है, जिससे सियासी तस्वीर बदल सकती है
  • दिनाकरन की पार्टी AMMK की स्थापना 2018 में हुई थी, जो जयललिता की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करती है
  • 2024 के लोकसभा चुनाव में AMMK ने एनडीए के साथ मिलकर दो सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई
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नई दिल्ली:

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है. लंबे समय तक अटकलों का दौर रहने के बाद टीटीवी दिनाकरन की आखिरकार एनडीए में वापसी हो गई है, जिससे राज्य की सियासी तस्वीर बदलती हुई दिखाई दे रही है. कुछ महीने पहले दिनाकरन ने एनडीए से दूरी बना ली थी, जिसके बाद माना जा रहा था कि AMMK और भाजपा के बीच संबंध ठंडे पड़ गए हैं. लेकिन हाल में बीजेपी नेता के. अन्नामलाई और दिनाकरन की बैठक ने जो संकेत दिए थे, अब वे पूरी तरह सच साबित हो गए हैं.

दिनाकरन ने 2018 में की थी पार्टी की स्थापना

दिनाकरन की पार्टी AMMK, जिसकी स्थापना 2018 में एआईएडीएमके से उनके अलग होने के बाद हुई थी, जयललिता की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करती है. पार्टी ने हमेशा कहा कि उसका लक्ष्य तमिलनाडु की जनता के हित में आवाज उठाना है. कडलूर के कट्टुमन्नारकोइल में दिनाकरन ने पहले यह भी कहा था कि AMMK की शुरुआत राजनीतिक धोखे के खिलाफ हुई थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनका एनडीए में लौटने का फैसला नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

2024 के लोकसभा चुनाव मे 2 सीटों पर लड़ा था चुनाव

2024 के लोकसभा चुनाव में AMMK ने एनडीए के साथ मिलकर दो सीटों थेनी और तिरुचिरापल्ली पर चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं मिली. इसके बावजूद भाजपा ने दिनाकरन को तमिलनाडु में एक महत्वपूर्ण चेहरा माना और लगातार संपर्क बनाए रखा. अब जब दिनाकरन ने औपचारिक रूप से एनडीए में दोबारा प्रवेश कर लिया है, इसे भाजपा के लिए राहत और विपक्ष के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.

विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु में भाजपा अपनी जमीन मजबूत करने के प्रयास में लगी है और दिनाकरन जैसे प्रभावशाली नेता का साथ मिलना उसे दक्षिण में नया राजनीतिक स्पेस दे सकता है. वहीं, AMMK की वापसी से एनडीए का गठबंधन और बड़ा हुआ है. अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि BJP-AMMK मिलकर राज्य में नया समीकरण कैसे तैयार करते हैं और क्या यह साझेदारी एआईएडीएमके को भी अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी.

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