- बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने डीएम पर बंधक बनाने का आरोप लगाया था
- एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने बैठक में सिटी मजिस्ट्रेट को सोहार्दपूर्ण माहौल में समझाने की बात कही है
- देश दीपक सिंह ने कहा कि डीएम आवास पर किसी प्रकार का दबाव या जबरन रोकने की स्थिति नहीं थी
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा डीएम पर लगाए गए बंधक बनाने के आरोपों ने प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है. अब इस मामले में एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह का बयान सामने आया है, जिन्होंने बैठक में हुई पूरी घटना का विवरण दिया और आरोपों को बेबुनियाद बताया. (एडीएम न्यायिक) देश दीपक सिंह के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को डीएम आवास पर “सोहार्दपूर्ण माहौल” में बैठाकर समझाने का प्रयास किया गया था.
देश दीपक सिंह ने मीडिया को क्या बताया?
उन्होंने कहा कि वहां न तो कोई दबाव था और न ही किसी प्रकार की जबरन रोककर रखने की स्थिति. “हम तीनों एडीएम प्रशासन, एडीएम सिटी और मैं खुद मीटिंग में मौजूद थे. चाय पिलाई गई, मिठाई खिलाई गई. उनसे केवल यह कहा गया कि सरकारी नौकरी है, इतने दिन साथ काम किया है, बड़े भाई की तरह समझ रहा हूं,” एडीएम ने कहा. एडीएम देश दीपक सिंह ने यह भी साफ किया कि डीएम किसी भी समय बाथरूम में नहीं गए थे और न ही सिटी मजिस्ट्रेट को किसी कमरे में बंद किया गया था. उन्होंने कहा कि “बंधक बनाए जाने का आरोप पूरी तरह गलत है और ऐसा कुछ नहीं हुआ.”
इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कथित बदसलूकी और यूजीसी की नई गाइडलाइन्स को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेजते हुए कहा कि यह “स्वधर्म और स्वाभिमान” का फैसला है.
अग्निहोत्री ने क्या कहा था?
अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों को “काला कानून” बताते हुए दावा किया कि यह शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित करेंगे. अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि डीएम आवास पर उन्हें बंधक बनाया गया और अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा. लेकिन एडीएम (जे) ने इसे पूरी तरह निराधार बताया.
इस बीच, यूपी सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं. इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच हुई फोन वार्ता भी सामने आई, जिसमें शंकराचार्य ने कहा कि अग्निहोत्री का इस्तीफा पीड़ा भी देता है और प्रेरणा भी, क्योंकि इतने कड़े परिश्रम से प्राप्त पद छोड़ना कठिन फैसला होता है. उन्होंने अग्निहोत्री को धर्म के क्षेत्र में बड़ा दायित्व देने का प्रस्ताव भी रखा. बरेली प्रशासन ने अब स्पष्ट कर दिया है कि “बंधक बनाने” का आरोप तथ्यहीन है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर यह विवाद लगातार चर्चा में है.
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