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अदीना मस्जिद VS आदिनाथ मंदिरः बंगाल के मालदा में 653 साल पुरानी इमारत पर विवाद क्यों?

बंगाल के मालदा जिले में स्थित अदीना मस्जिद को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है. यहां आदिनाथ मंदिर होने का दावा करने वाले लोगों ने सावन में शिवलिंग की स्थापना और रुद्राभिषेक की तैयारी की है.

अदीना मस्जिद VS आदिनाथ मंदिरः बंगाल के मालदा में 653 साल पुरानी इमारत पर विवाद क्यों?
मालदा में अदीना मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है.
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  • पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की ऐतिहासिक अदीना मस्जिद एक बार फिर विवादों में है.
  • यहां आदिनाथ मंदिर होने का दावा करने वाले लोगों ने सावन में शिवलिंग स्थापना करने का ऐलान किया है.
  • इससे माहौल बिगड़ने का डर बना है. पुलिस ने भी एडवाइजरी जारी कर कहा गैर-कानूनी हरकत पर कार्रवाई की जाएगी.
नई दिल्ली:

Adina Mosque Dispute Malda: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की ऐतिहासिक अदीना मस्जिद एक बार फिर विवादों में है. 27 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने में 'आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति' ने मस्जिद से करीब 50 मीटर दूर स्थित एक मंदिर में लगभग 3.6 फीट ऊंचे और डेढ़ टन वजनी शिवलिंग की स्थापना और रुद्राभिषेक का कार्यक्रम घोषित किया है. समिति का दावा है कि वर्तमान अदीना मस्जिद की जगह पहले आदिनाथ शिव मंदिर था. सोशल मीडिया पर शिवलिंग स्थापना की बात सामने आने के बाद तनाव बढ़ने लगा है. 

मंदिर समिति ने कहा- कानूनी प्रक्रिया से आगे बढ़ेंगे

समिति का कहना है कि भविष्य में अदालत की अनुमति मिलने पर संरक्षित परिसर के भीतर भी शिवलिंग स्थापित करने की मांग की जाएगी. हालांकि समिति का कहना है कि वो केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि नहीं करेगी. 

पुरातत्व सर्वेक्षण का रिकॉर्ड- 1373 में सिकंदर शाह ने बनवाया मस्जिद

दूसरी ओर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अदीना मस्जिद का निर्माण 1373 ईस्वी में बंगाल सल्तनत के सुल्तान सिकंदर शाह ने कराया था और ये प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है.

शिवलिंग स्थापना की तैयारी के बीच पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

पुरातत्व सर्वेक्षण के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 653 साल पुराने इस इमारत को विवाद गहरा गया है. सोशल मीडिया पर शिवलिंग स्थापना से जुड़े कार्यक्रम की जानकारी सामने आने के बाद मालदा पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि संरक्षित स्मारक के भीतर बिना अनुमति किसी भी धार्मिक आयोजन, निर्माण या ढांचे में बदलाव की कोशिश कानून का उल्लंघन होगी और ऐसी स्थिति में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

सोशल मीडिया पर अदीना मस्जिद के पास शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर अदीना मस्जिद के पास शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है.

हुगली से शिवलिंग लाकर स्थापित करने की तैयारी

‘आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर' समिति के सदस्यों ने हाल ही में संरक्षित स्मारक के पास पूजा-अर्चना की और घोषणा की कि हुगली जिले के तारकेश्वर से लाया गया 3.6 फुट ऊंचा और 1.5 टन वजन वाला शिवलिंग सावन के महीने के दौरान पास के एक मंदिर के अंदर स्थापित किया जाएगा.

संगठन ने अपने पुराने दावे को भी दोहराया कि मूल आदिनाथ मंदिर कभी उसी स्थान पर था जहां अब मस्जिद है. संगठन ने कहा कि वह अंततः संरक्षित स्मारक के अंदर शिवलिंग स्थापित करने के लिए कानूनी अनुमति मांगेगा.

मंदिर समिति के संरक्षक ने क्या कहा?

आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति के मुख्य संरक्षक और भाजपा नेता काजल गोस्वामी ने को बताया, “हम सोमवार को अपने मंदिर के अंदर पूजा करेंगे और शिवलिंग स्थापित करेंगे. वर्तमान मस्जिद के निर्माण के लिए मूल आदिनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था. हम कानून का पालन करेंगे और कोई उपद्रव नहीं चाहते.”

उन्होंने कहा, “हम मस्जिद परिसर के अंदर शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने और किसी सक्षम अदालत से अनुमति मिलने के बाद ही करेंगे. हम किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे.”

गोस्वामी का दावा- मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग सहित कई हिंदू और बौद्ध प्रतीक

समिति का दावा है कि मस्जिद परिसर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित मौजूदा आदिनाथ मंदिर लगभग 120 साल पुराना है और मूल मंदिर के अवशेष एएसआई-संरक्षित स्मारक के अंदर मौजूद हैं. गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मस्जिद परिसर के अंदर एक शिवलिंग के अलावा कई हिंदू और बौद्ध प्रतीक भी दिखाई देते हैं. 

पिछले साल सांसद यूसुफ पठान ने यहां का दौरा किया था, तब भी यह मामला उठा था.

पिछले साल सांसद यूसुफ पठान ने यहां का दौरा किया था, तब भी यह मामला उठा था.

सांसद यूसुफ पठान के दौरे से गरमाई थी राजनीति

यह मुद्दा पिछले साल चर्चा में आया था जब बहरामपुर के सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान ने इस स्मारक का दौरा करके सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा की थीं. पश्चिम बंगाल भाजपा ने इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया था कि यह मस्जिद नहीं बल्कि ऐतिहासिक आदिनाथ मंदिर था.

भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक ने संसद में भी उठाया मामला

भाजपा के राज्यसभा सदस्य और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया था कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद हिंदू और बौद्ध ढांचों की सामग्रियों का उपयोग करके किया गया था. स्थानीय परंपराओं और ऐतिहासिक विवरणों का हवाला देते हुए, उन्होंने दावा किया कि इस स्थान पर मूल रूप से भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित आदिनाथ मंदिर था.

अदीना मस्जिद की दीवारों पर गणेश की प्रतिमा होने का दावा.

अदीना मस्जिद की दीवारों पर गणेश की प्रतिमा होने का दावा.

कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर

इस वर्ष की शुरुआत में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एएसआई ने ढांचे में हिंदू देवी-देवताओं और प्रतीकों की कथित मौजूदगी के बावजूद संरक्षित स्मारक की पहचान गलत तरीके से अदीना मस्जिद के रूप में की थी.

मस्जिद के लिए मंदिर ध्वस्त किए जाने का दावा

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस स्थल को लेकर जनभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं. उन्होंने कहा, “राम मंदिर की तरह ही, इस मंदिर को भी मस्जिद बनाने के लिए कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया गया था. इस स्थल से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और ऐतिहासिक सच्चाई सामने आनी चाहिए.”

मालदा से 16 किमी दूर पांडुआ में स्थित है अदीना मस्जिद

मालदा शहर से लगभग 16 किलोमीटर उत्तर में पांडुआ में स्थित अदीना मस्जिद को 14वीं शताब्दी की भारत-इस्लामी वास्तुकला के सबसे बेहतरीन जीवित उदाहरणों में से एक माना जाता है. 260 पत्थर के खंभों और 387 गुंबददार मेहराबों वाले इस परिसर को कभी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद माना जाता था.

हालांकि एक भूकंप के कारण यह काफी क्षतिग्रस्त हो गई थी और 19वीं शताब्दी से वीरान पड़ी है, फिर भी यह स्मारक पश्चिम बंगाल के सबसे महत्वपूर्ण मध्यकालीन पुरातात्विक स्थलों में से एक बना हुआ है.

यह भी पढ़ें - अदीना मस्जिद नहीं आदिनाथ मंदिर... क्रिकेटर और नेता युसूफ पठान को बीजेपी का जवाब, जानिए पूरा मामला

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