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असम वाले ज्यादातर पनीर नकली खा रहे? दिवाली से पहले लिए गए 70% सैंपल फेल

असम में दिवाली से पहले लिए गए पनीर के 70% सैंपल जांच में फेल हो गए. इसके बाद सरकार ने जांच और निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है.

असम वाले ज्यादातर पनीर नकली खा रहे? दिवाली से पहले लिए गए 70% सैंपल फेल
दिवाली से पहले असम में बड़ी मात्रा में नकली पनीर मिला है. (सांकेतिक तस्वीर)
NDTV
दिसपुर:

दिवाली से पहले असम में खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर चेतावनी जारी की गई है. इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच असम के बाजारों से लिए गए पनीर के लगभग 70% सैंपल तय खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं. इसके चलते सरकार ने दिवाली से पहले जांच और निरीक्षण तेज करने का फैसला किया है.

असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने बताया कि खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने 1 जनवरी से 31 अक्तूबर के बीच पनीर के 60 सैंपल लिए थे. लैब टेस्ट में इनमें से 41 सैंपल मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. इनमें से 36 को 'सबस्टैंडर्ड' और 5 को 'अनसेफ' की श्रेणी में रखा गया है.

सिंघल ने कहा कि विभाग अब पनीर के सैंपल लेने और जांच करने की प्रक्रिया को और बढ़ाएगा, ताकि तय मानकों को पूरा न करने वाले पनीर की बिक्री को रोका जा सके.

मंत्री ने कहा, '1 जनवरी 2026 से 31 अक्टूबर तक, यानी इन 10 महीनों में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने बाजार से पनीर के 60 सैंपल लिए. इनमें से लगभग 70% सैंपल तय मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. इन 41 सैंपलों में से 36 'सबस्टैंडर्ड' श्रेणी में आते हैं और 5 'असुरक्षित' श्रेणी में.'

मिलावटखोरों पर होगी कानूनी कार्रवाई

मंत्री ने व्यापारियों और विक्रेताओं को 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम' के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी. सिंघल के अनुसार, गलत लेबलिंगके लिए 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, जबकि घटिया गुणवत्ता वाला (सबस्टैंडर्ड) खाद्य पदार्थ बेचने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

अगर खाद्य पदार्थ 'असुरक्षित' पाया जाता है, तो जुर्माना 10 लाख रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा, संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जेल की सजा भी हो सकती है, जो उम्रकैद तक भी बढ़ सकती है.

सिंघल ने कहा, 'हम अब और अधिक सख्ती बरतेंगे और पूरी तरह सतर्क रहेंगे. हम बड़ी संख्या में सैंपल लेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि असम के लोग घटिया और असुरक्षित पनीर न खाएं.'

मानकों को पूरा न करने वाले इस पनीर के स्रोत के बारे में सिंघल ने बताया कि अधिकारियों के अनुसार, इसका एक बड़ा हिस्सा असम के बाहर से आया हो सकता है. हालांकि, इसके स्रोत का पता लगाने के लिए उचित बिल और लेन-देन के अन्य रिकॉर्ड की जरूरत होगी.

कहां से आया पनीर? करना होगा साबित

उन्होंने कहा कि अगर व्यापारी, वितरक और खुदरा विक्रेता यह साबित नहीं कर पाते कि पनीर कहां से आया है, तो उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

मंत्री ने कहा, "पनीर का कारोबार करने वाला कोई भी व्यक्ति, अगर यह साबित नहीं कर पाता कि उसने पनीर किस खास व्यक्ति, फर्म या संस्था से खरीदा है यानी अगर कोई बिल नहीं है और लेन-देन का कोई सबूत नहीं है तो जिसके पास भी वह पनीर मिलेगा, उसे ही जिम्मेदार माना जाएगा, मानो उसी ने वह पनीर बनाया हो."

सरकार ने उपभोक्ताओं से कहा है कि त्योहारों के मौसम में पनीर खरीदते समय वे सावधान रहें, क्योंकि इस दौरान डेयरी उत्पादों की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है. उम्मीद है कि विभाग बाजारों में जांच तेज करेगा, ताकि ऐसे उत्पादों की पहचान की जा सके जो खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते.

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