- कोयंबटूर की 19 वर्षीय अनुकीर्तना ने NEET री-एग्जाम के चार दिन पहले आत्महत्या कर ली
- राजस्थान के तीन छात्र भी NEET परीक्षा के दबाव में आत्महत्या कर अपनी जान गंवा चुके हैं
- परीक्षा के खिलाफ तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. प्रदर्शनकारी NEET से छूट की मांग कर रहे हैं
लखनऊ की शिवानी, सीकर के उमेश, झुंझुनूं के प्रदीप माहिच और अब कोयंबटूर की अनुकीर्तना, NEET पेपर लीक और री-एग्जाम के बोझ ने अब तक न जाने कितने परिवारों के चिराग बुझा दिए. ताजा मामला तमिलनाडु का है. 21 जून को होने वाले री-एग्जाम से पहले कोयंबटूर की रहने वाली 19 साल की अनुकीर्तना ने आत्महत्या कर ली. वह पहले भी दो बार NEET एग्जाम दे चुकी थी. पेपर लीक और रद्द होने के बाद वह फिर से एग्जाम देने की तैयारी कर रही थी. पुलिस का कहना है कि शायद वह परीक्षा का दबाव झेल नहीं सकी और मौत को गले लगा लिया.
नीट री-एग्जाम से 4 दिन पहले छात्रा ने की आत्महत्या
अनुकीर्तना पहली नहीं है, जिसने एग्जाम के दबाव के चलते मौत को गले लगाया. हालही में राजस्थान के तीन छात्र भी नीट एग्जाम के दबाव में अब तक सुसाइड कर चुके हैं. दिल्ली में रहकर एग्जाम की तैयारी कर रही अलवर की रहने वाली 18 साल की रणु मीणा ने 14 जून को फांसी लगाकर जान दे दी. परिवार का कहना है कि वह पढ़ाई को लेकर बहुत सीरियस थी और रोजाना घंटों लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ती थी. सीकर में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रहे झुंझुनू के नवलगढ़ के रहने वाले छात्र उमेश माली ने 15 जून को फांसी लगाकर जान दे दी. उमेश से पहले झुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी का रहने वाला छात्र प्रदीप माहिच ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. वहीं लखनई की शिवानी नाम की छात्रा ने भी मौत को गले लगा लिया था.
परीक्षा के दबाव के चलते की आत्महत्या
अनुकीर्तना के सुसाइड के बाद नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के खिलाफ नए सिरे से विरोध शुरू हो गया. तमिलनाडु में एक बार फिर से एग्जाम से छूट की पुरानी मांग उठ रही है. मामले की जांच कर रहे एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने NDTV को बताया कि पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि दोबारा परीक्षा देने की निराशा के चलते छात्रा यह कदम उठाने के लिए मजबूर हुई है. हालांकि घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस अब छात्रा की मौत की सही वजह का पता लगा रही है.
तमिलनाडु में NEET के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
छात्रा की मौत के बाद कोयंबटूर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी NEET को खत्म करने की मांग कर रहे हैं. वहीं DMK सरकार ने भी इस मामले पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. पार्टी ने फिर से तमिलनाडु के लिए NEET से छूट की अपनी मांग को दोहराया. बता दें कि तमिलनाडु NEET की शुरुआत से ही इसका विरोध करता रहा है. राज्य का कहना है कि इस एग्जाम से सिर्फ उन छात्रों को ज्यादा फायदा पहुंचता है, जो अमीर परिवारों से ताल्लुक रखते हैं और महंगी प्राइवेट कोचिंग का खर्च उठाने में सक्षम हैं. सरकार का तर्क है कि नीट एग्जाम गरीब और ग्रामीण परिवारों के छात्रों के लिए नुकसानभरा है, भले ही उन्होंने 12वीं के की बोर्ड एग्जाम में बढ़िया प्रदर्शन किया हो.
NEET शुरू होने से ऐसे मिलता था एडमिशन
दरअसल NEET शुरू होने से पहले करीब एक दशक तक, तमिलनाडु में मेडिकल छात्रों को बिना किसी एंट्रेंस एग्जाम के सिर्फ 12वीं के नंबरों के आधार पर एडमिशन दिया जाता था. एक बार फिर से राज्य में पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग उठ रही हैय इसके समर्थकों का तर्क है कि इससे सरकारी स्कूलों और ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए मेडिकल एजुकेशन तक पहुंच बेहतर हुई थी.तमिलनाडु विधानसभा से NEET से छूट के लिए एक बिल पास हुआ था, लेकिन उसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी नहीं मिल सकी, जिस वजह से राज्य में यह एंट्रेंस एग्जाम लागू है.
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