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119 करोड़ का बैंक फ्रॉड: मुंबई-अहमदाबाद में CBI की बड़ी रेड, 7 ठिकानों पर तलाशी

CBI के अनुसार यह मामला Shri Hari Extrusion Pvt. Ltd. से संबंधित है. मुंबई की विशेष CBI अदालत से सर्च वारंट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई.

119 करोड़ का बैंक फ्रॉड: मुंबई-अहमदाबाद में CBI की बड़ी रेड, 7 ठिकानों पर तलाशी
  • CBI ने मुंबई और अहमदाबाद में दो बैंक फ्रॉड मामलों में सात जगहों पर 21 मई 2026 को छापेमारी की.
  • श्री हरि एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक से 61.98 करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी का आरोप है
  • जांच में पाया गया कि कंपनी ने बैंक की रकम को अन्य कंपनियों में ट्रांसफर कर फंड का गलत इस्तेमाल किया.
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देश के सरकारी बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले दो बड़े बैंक फ्रॉड मामलों में CBI ने बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने 21 मई 2026 को मुंबई और अहमदाबाद में कुल 7 जगहों पर छापेमारी की. ये कार्रवाई दो अलग-अलग मामलों में की गई, जिनमें कंपनियों पर करीब 119 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है.

CBI के मुताबिक पहला मामला Shri Hari Extrusion Pvt. Ltd. से जुड़ा है. इस केस में कंपनी के डायरेक्टर्स के घरों पर तलाशी ली गई. मुंबई की विशेष CBI अदालत से सर्च वारंट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई. जांच एजेंसी को छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और संदिग्ध रिकॉर्ड मिले हैं, जिन्हें कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.

जांच में सामने आया है कि कंपनी ने Punjab National Bank से कैश क्रेडिट और टर्म लोन के रूप में करीब 61.98 करोड़ रुपये की सुविधाएं ली थीं. आरोप है कि लोन लेने के बाद कंपनी और उसके जिम्मेदार लोगों ने फर्जी तरीके अपनाकर बैंक के पैसों का गलत इस्तेमाल किया. CBI के अनुसार लोन की रकम को दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, बहन कंपनियों के साथ संदिग्ध लेनदेन किए गए, बिक्री से आने वाली रकम बैंक के जरिए नहीं चलाई गई और संबंधित पार्टियों को भुगतान कर फंड डायवर्ट किया गया.

दूसरा मामला Jay Formulations Ltd. से जुड़ा है. इस केस में अहमदाबाद कोर्ट से मिले सर्च वारंट के आधार पर कंपनी के डायरेक्टर्स के घरों पर छापेमारी की गई. जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने State Bank of India को करीब 57.05 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया.

CBI के मुताबिक कंपनी ने फर्जी अकाउंट बुक और गलत वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर बैंक से फंड बेस्ड और नॉन-फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं हासिल कीं. इसके बाद लोन की रकम को तय उद्देश्य के बजाय दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया.

CBI का कहना है कि दोनों मामलों में सरकारी बैंकों को कुल 119.03 करोड़ रुपये का गलत नुकसान पहुंचा है. एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे फ्रॉड नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसे कहां-कहां ट्रांसफर किए गए. सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में इस मामले में कई और लोगों से पूछताछ हो सकती है और जांच के आधार पर आगे गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जा सकती है.

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