
पत्रकार गौरी लंकेश (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
सोशल एक्टिविस्ट, पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वह बेंगलुरु की रहने वाली थीं. कन्नड़ साप्ताहिक अखबार 'लंकेश पत्रिके' की वह संपादक थी जिसे उनके पिता पी. लंकेश ने शुरू किया था. 1962 में जन्मी गौरी लंकेश ने अपने करियर की शुरुआत बेंगलुरू में 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से की. कुछ समय के लिए वह दिल्ली आईं और फिर वापस बेंगलुरू लौट गईं जहां 'संडे' मैग्जीन के साथ नौ वर्षों तक काम किया. वर्ष 2000 में जब उनके पिता की मौत हुई तब वह इनाडु के तेलुगू चैनल के लिए काम कर रही थीं.
रेडिफ.कॉम ने 15 मार्च 2000 को गौरी लंकेश का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया था. इंटरव्यू में गौरी ने कहा था कि अपने पिता की मौत के बाद अपने भाई इंद्रजीत के साथ वह 'लंकेश पत्रिके' के प्रकाशक मणि से मिलीं और प्रकाशन बंद करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. तब वह गौरी लंकेश साप्ताहिक अखबार की संपादक बनीं और उनका भाई इंद्रजीत इसका बिजनेस देखने लगा.
यह भी पढ़ें : पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर आखिर क्या बोल गए लालू यादव, होने लगी निंदा
2001 से ही गौरी और इंद्रजीत के अखबार की आइडियोलॉजी को लेकर कई लोग सवाल उठाने लगे थे. 2005 में यह मतभेद उस समय लोगों के सामने आ गया, जब नक्सली हमले से संबंधित एक रिपोर्ट में गौरी के खिलाफ मामला पुलिस में चला गया.
VIDEO: पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर रवीश कुमार का विरोध स्वर
इसके बाद गौरी लंकेश अपने भाई से अलग होकर कन्नड़ में ही अपना साप्ताहिक अखबार 'गौरी लंकेश पत्रिके' का प्रकाशन शुरू कर दिया. गौरी लंकेश पर शुरू से ही नक्सल समर्थक एवं हिंदुत्व विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं.
रेडिफ.कॉम ने 15 मार्च 2000 को गौरी लंकेश का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया था. इंटरव्यू में गौरी ने कहा था कि अपने पिता की मौत के बाद अपने भाई इंद्रजीत के साथ वह 'लंकेश पत्रिके' के प्रकाशक मणि से मिलीं और प्रकाशन बंद करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. तब वह गौरी लंकेश साप्ताहिक अखबार की संपादक बनीं और उनका भाई इंद्रजीत इसका बिजनेस देखने लगा.
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2001 से ही गौरी और इंद्रजीत के अखबार की आइडियोलॉजी को लेकर कई लोग सवाल उठाने लगे थे. 2005 में यह मतभेद उस समय लोगों के सामने आ गया, जब नक्सली हमले से संबंधित एक रिपोर्ट में गौरी के खिलाफ मामला पुलिस में चला गया.
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इसके बाद गौरी लंकेश अपने भाई से अलग होकर कन्नड़ में ही अपना साप्ताहिक अखबार 'गौरी लंकेश पत्रिके' का प्रकाशन शुरू कर दिया. गौरी लंकेश पर शुरू से ही नक्सल समर्थक एवं हिंदुत्व विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं.
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