लखनऊ:
एनआरएचएम घोटाले की जांच में सीएजी को क़रीब 5000 करोड़ का घोटाला मिला है जिसका कोई हिसाब नहीं मिल रहा है। अब तक 100 जगहों पर छापे मारे जा चुके हैं।
एनआरएचएम घोटाले की जांच में सीएजी को यूपी में 5000 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है। सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि 1170 करोड़ रुपये का ठेका बिना करार के दिया गया, वहीं 1085 करोड़ का भुगतान बिना दस्तखत के हुआ। इस महाघोटाले में अबतक करीब 100 जगहों पर सीबीआई छापा मार चुकी है। दो मंत्री और एक सीनियर आईएएस अफसर जांच के घेरे में हैं। चुनाव के वक्त इस घोटाले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोल दिया है।
एनडीटीवी को मिली कैग रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 2008 से 2011 के बीच एनआरएचएम स्कीम को लागू करने की पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक कई काम माया सरकार ने अनधिकृत लोगों से कराए। कैग ने कहा है कि 3000 करोड़ रुपये दिए जाने और खर्च की ज़िम्मेदारी साफ़ तौर पर तय नहीं की गई है।
एक हज़ार करोड़ रुपये के काम पर ओपेन टेंडर नहीं किया गया और इतना ही नहीं, एक आईएएस अधिकारी को फ़ैसला लेने की खुली छूट दी गई।
कैग के मुताबिक केंद्र से दिए गए 8500 करोड़ में से पांच हज़ार करोड़ का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है।
एनआरएचएम घोटाले की जांच में सीएजी को यूपी में 5000 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है। सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि 1170 करोड़ रुपये का ठेका बिना करार के दिया गया, वहीं 1085 करोड़ का भुगतान बिना दस्तखत के हुआ। इस महाघोटाले में अबतक करीब 100 जगहों पर सीबीआई छापा मार चुकी है। दो मंत्री और एक सीनियर आईएएस अफसर जांच के घेरे में हैं। चुनाव के वक्त इस घोटाले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोल दिया है।
एनडीटीवी को मिली कैग रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 2008 से 2011 के बीच एनआरएचएम स्कीम को लागू करने की पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक कई काम माया सरकार ने अनधिकृत लोगों से कराए। कैग ने कहा है कि 3000 करोड़ रुपये दिए जाने और खर्च की ज़िम्मेदारी साफ़ तौर पर तय नहीं की गई है।
एक हज़ार करोड़ रुपये के काम पर ओपेन टेंडर नहीं किया गया और इतना ही नहीं, एक आईएएस अधिकारी को फ़ैसला लेने की खुली छूट दी गई।
कैग के मुताबिक केंद्र से दिए गए 8500 करोड़ में से पांच हज़ार करोड़ का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है।