
2002 के गुजरात दंगा मामले में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने के बावजूद उनके लिए अमेरिकी वीजा नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को वीजा का आवेदन देने की अनुमति दी गई थी और साथ ही इस पर अमेरिकी कानून के तहत किए जाने वाले विचार के लिए इंतजार करने को कहा गया था।
उन्होंने कहा, हमारी वीजा नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मोदी को वीजा आवेदन की अनुमति तथा अन्य आवेदकों की तरह इस पर किए जाने वाले विचार के लिए इंतजार करने को कहा गया था।
अहमदाबाद की एक अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा बंद कर दिए गए मामले के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया।
इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अदालत के फैसले और मोदी पर एक महिला की जासूसी के लगे आरोप की जांच कराने संबंधी खबर प्रकाशित कर इसे 'विक्टरी एंड सेटबैक फॉर इंडियन आपोजिशन लीडर' शीर्षक दिया है।
इसके मुताबिक, मोदी की गंभीर छवि उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसलिए यह मामला संभवत: मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को कम नहीं कर पाएगा। साथ में लाए गए इस मामले ने यह दिखाया कि क्यों उन पर इतनी असहमति है।
एक अन्य समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जनरल में लिखा गया है कि अदालत का फैसला 2014 संसदीय चुनाव से पहले मोदी के आलोचकों को कमजोर करेगा।
इसके मुताबिक, संभवत: मई में होने वाले आम चुनाव से कुछ महीने पहले गुरुवार का आया फैसला सत्तारूढ़ पार्टी सहित अन्य आलोचकों को कमजोर करेगा, जो मोदी को मुस्लिम विरोधी कहते हुए वृहद और विविधता भरे देश की सरकार बनने के लिए अनुपयुक्त मानता है।
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