
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए कृषि क़ानून के बारे में हर आजकल केंद्रीय मंत्री पूरे देश में संवाददाता सम्मेलन कर रहे हैं जहां उनके निशाने पर कांग्रेस और उनके सहयोगी होते हैं. शुक्रवार को पटना में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने इसी क्रम में पत्रकारों के सवाल का जवाब दिया.
उन्होंने माना कि एमएसपी (MSP) से कम दाम पर ना ख़रीदने का प्रावधान क्यों नहीं किया गया हैं? इस पर प्रसाद का कहना था कि जब से एमएसपी पर फ़सल की ख़रीद की शुरुआत हुई हैं ये प्रशासनिक पार्ट में हैं. आज तक किसी क़ानून का पार्ट नहीं हुआ. जबकि कई बार सरकारें आई वादा हुआ, लेकिन एमएसपी प्रशासन द्वारा केंद्रीय कैबिनेट तय करता हैं . इसलिए भारत के प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री और रक्षा मंत्री की बातों पर विश्वास करना चाहिए .
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दूसरा पूर्व सहयोगी अकाली दल के नेताओं के बारे में उन्होंने माना कि हमारे उनके प्रमाणिक अंतर हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'कुछ पंजाब की आंतरिक राजनीति भी होगी. लेकिन ये क़ानून सीधा नहीं बनाया गया, पहले अध्यादेश आया, तीन महीने के लिए. लोकसभा में पारित हुआ, तब तक उनका विरोध नहीं था, केवल उनका विरोध राज्य सभा में पारित होने के समय सामने आया.'
अपने दल के दो स्वर्गीय नेता सुषमा स्वराज और अरूण जेटली के लोकसभा और राज्यसभा में एपीएमसी ऐक्ट को ख़त्म किए जाने के विरोध में भाषण के वीडियो पर रविशंकर ने कहा कि उन्होंने कुछ सलाह दी थी जिसकी तुलना पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के वीडियो से इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि वो किसानो के नेता हैं .
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