
हजारों की तादाद में लोगों ने दी डॉ कलाम को आखिरी विदाई
रामेश्वरम:
हर कोई उनके आखिरी दर्शन कर लेना चाहता था। कोई बस से पहुंचा था, कोई समुद्री बोट से और कोई ट्रेन से यहां पहुंचा हुआ था। हरेक की बस एक ही इच्छा थी कि पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को आखिरी विदाई दे दी जाए। तमिलनाडु में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ पीएम और तमाम नेताओं की मौजूदगी में भावभीनी आखिरी विदाई दी गई।
लंबी दूरी पैदल तय करके पहुंचे लोग..
जनता के राष्ट्रपति का अंतिम संस्कार करते समय जब कई वीआईपी लोगों की मौजूदगी होनी ही थी तो तय था कि आम आदमी को उनकी एक झलक पाने या दर्शनों के लिए उत्साही भीड़ में शामिल भर होने के लिए मीलों चलकर पसीना बहाकर जाना होगा। गाड़ियों को सिक्यॉरिटी कारणों से अंतिम संस्कार स्थल से काफी पहले ही रोक दिया गया था।
चेन्नई, पॉन्डिचेरी... अमेरिका तक से आए लोग
रामेश्वरम में एक रात पहले से ही होटेल और तमाम लॉज बुक थे। कई लोग सड़कों पर सोए। रामेश्वरम में उनकी अंतिम विदाई के लिए चेन्नई और पॉन्डिचेरी से लोग आए हुए थे। कई उससे भी दूर से आए थे।
'यहां आना बेहद सम्मान की बात है...'
एक व्यक्ति ने बताया कि वह अमेरिका से आया है। उसने बताया, 'यहां आना बेहद सम्मान की बात है..डॉ कलाम कहते थे जहां भी जाओ, एक दूसरे से बस प्यार करो। उनकी सादगी ने कई लोगों को आकर्षित किया। इतनी ज्यादा भीड़ मैंने पहले कभी नहीं देखी।' एक स्टूडेंट ने कहा, 'मैं डॉक्टर कलाम का बड़ा फैन हूं। वह युवाओं के असली हीरो थे।'
'भारत माता की जय'..
रात 10 बजे उनका पार्थिव शरीर यहां लाया गया था। हरे शॉल में लिपटा कर रखे गए उनके शरीर को सुबह साढ़े 9 बजे तीनों सेना के जवान मस्जिद ले गए। वहां आलिन ने विशेष प्रार्थना की। विदाई के आखिरी वक्त लोग ने नारे लगाए- भारत माता की जय।
लंबी दूरी पैदल तय करके पहुंचे लोग..
जनता के राष्ट्रपति का अंतिम संस्कार करते समय जब कई वीआईपी लोगों की मौजूदगी होनी ही थी तो तय था कि आम आदमी को उनकी एक झलक पाने या दर्शनों के लिए उत्साही भीड़ में शामिल भर होने के लिए मीलों चलकर पसीना बहाकर जाना होगा। गाड़ियों को सिक्यॉरिटी कारणों से अंतिम संस्कार स्थल से काफी पहले ही रोक दिया गया था।
चेन्नई, पॉन्डिचेरी... अमेरिका तक से आए लोग
रामेश्वरम में एक रात पहले से ही होटेल और तमाम लॉज बुक थे। कई लोग सड़कों पर सोए। रामेश्वरम में उनकी अंतिम विदाई के लिए चेन्नई और पॉन्डिचेरी से लोग आए हुए थे। कई उससे भी दूर से आए थे।
'यहां आना बेहद सम्मान की बात है...'
एक व्यक्ति ने बताया कि वह अमेरिका से आया है। उसने बताया, 'यहां आना बेहद सम्मान की बात है..डॉ कलाम कहते थे जहां भी जाओ, एक दूसरे से बस प्यार करो। उनकी सादगी ने कई लोगों को आकर्षित किया। इतनी ज्यादा भीड़ मैंने पहले कभी नहीं देखी।' एक स्टूडेंट ने कहा, 'मैं डॉक्टर कलाम का बड़ा फैन हूं। वह युवाओं के असली हीरो थे।'
'भारत माता की जय'..
रात 10 बजे उनका पार्थिव शरीर यहां लाया गया था। हरे शॉल में लिपटा कर रखे गए उनके शरीर को सुबह साढ़े 9 बजे तीनों सेना के जवान मस्जिद ले गए। वहां आलिन ने विशेष प्रार्थना की। विदाई के आखिरी वक्त लोग ने नारे लगाए- भारत माता की जय।
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