
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी बेशक सरकार बनाने जा रही हों लेकिन दोनों के लिए ये इतना आसान नहीं होगा। प्रधानमंत्री से मिलकर बाहर आते ही खुद मुफ़्ती साहब ने कहा कि बीजेपी से बातचीत आसान नहीं थी।
2002 में बीजेपी ने कहा था कि आप अपने दोस्त चुन सकते हैं पड़ोसी नहीं, इसलिए पड़ोसियों को साथ लेकर चलना होगा। मुफ़्ती साहब ने पत्रकारों से कहा, 'ये एहम इसीलिए है क्योंकि बीजेपी की पाकिस्तान को लेकर अभी तक कड़ी पॉलिसी रही है, चाहे बात संघर्षविराम की हो या फिर बॉर्डर पर शेलिंग की। इस सब का नतीजा ये हुआ कि घाटी में फिदाईन हमले शुरू हो गए तो जम्मू में 50000 से ज़्यादा लोग बेघर हो गए। भारत ने पाकिस्तान से बातचीत करने से भी इनकार कर दिया था।
लेकिन मुफ़्ती साहब के इस बयान से अब कुछ और नतीजे सामने आएंगे। वैसे भारत के प्रधानमंत्री कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से फ़ोन पर बात कर चुके हैं। बेशक बातचीत क्रिकेट पर हुई हो। यही नहीं, रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। जल्द भारत के विदेश सचिव पाकिस्तान भी जा रहे हैं। तनाव कम करने की कोशिश शुरू कर दी गई है।
मुफ़्ती साहब भी मानते हैं कि ये पॉलिटिकल अलायन्स पहले है फिर वर्किंग अलायन्स है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंदर सिंह ने एनडीटीवी से कहा कि ये सरकार जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों की अपेक्षाएं पूरी करेगी क्योंकि वो प्रतिबद्ध है।
वैसे ध्यान देने वाली बात ये भी है कि ये सारी कवायद ओबामा के दौरे के बाद शुरू हुई। बीजेपी जानती है कि घाटी में अगर वो अपनी सरकार चाहती है तो उसे अपना रुख थोड़ा बदलना होगा।
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