
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
सेना में ग़ैर-ज़रूरी खर्चों की कटौती के लिए सरकार कदम उठाएगी। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि सैन्य बलों में 'एक्स्ट्रा फ्लैब' यानी अतिरिक्त चर्बी को घटाने की ज़रूरत है ताकि संसाधन बचाए जा सकें। पर्रिकर रक्षा बजट पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। पर्रिकर ने बताया कि सेना को ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कहा गया है, जहां बजट को कम किया जा सके।
उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना में पहले हर जगह टेलिफोन ऑपरेटर होते थे, लेकिन अब स्वचालित तकनीक के विकास के साथ कई क्षेत्रों में आधुनिकीकरण होने के कारण इतने टेलिफोन ऑपरेटरों की ज़रूरत नहीं है। ज़ाहिर है इससे मैनपावर की बचत होगी।
पर्रिकर ने उदाहरण दिया कि अगर सेना में एक ट्रक ड्राइवर को योग्यता साबित करने के लिए कई घंटों तक ट्रक चलाने का अभ्यास करना ज़रूरी है, तो यह काम सिमुलेटर की मदद से भी किया जा सकता है। इससे संसाधनों की बचत होगी।
उन्होंने यही बात वायुसेना के पायलट के लिए भी कही। हालांकि उन्होंने कहा कि यह किस तरह किया जाना है, यह काम सैन्य बलों पर ही छोड़ देना चाहिए। सेना में ग़ैरज़रूरी खर्च पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं।
उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना में पहले हर जगह टेलिफोन ऑपरेटर होते थे, लेकिन अब स्वचालित तकनीक के विकास के साथ कई क्षेत्रों में आधुनिकीकरण होने के कारण इतने टेलिफोन ऑपरेटरों की ज़रूरत नहीं है। ज़ाहिर है इससे मैनपावर की बचत होगी।
पर्रिकर ने उदाहरण दिया कि अगर सेना में एक ट्रक ड्राइवर को योग्यता साबित करने के लिए कई घंटों तक ट्रक चलाने का अभ्यास करना ज़रूरी है, तो यह काम सिमुलेटर की मदद से भी किया जा सकता है। इससे संसाधनों की बचत होगी।
उन्होंने यही बात वायुसेना के पायलट के लिए भी कही। हालांकि उन्होंने कहा कि यह किस तरह किया जाना है, यह काम सैन्य बलों पर ही छोड़ देना चाहिए। सेना में ग़ैरज़रूरी खर्च पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं।
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