सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की पत्नी व बेटे की जमानत के खिलाफ UP सरकार की अर्जी पर सुनवाई टाली

बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने आजम खान परिवार के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटकरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करायी है, जिसमें पुलिस चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. मुकदमा चल रहा है. 

सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की पत्नी व बेटे की जमानत के खिलाफ UP सरकार की अर्जी पर सुनवाई टाली

यूपी सरकार की याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

सपा नेता आजम खान (Azam Khan) की पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला की जमानत के खिलाफ यूपी सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को सुनवाई अगले हफ्ते के लिए टाल दी. यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमानत देने के फैसले को चुनौती दी है. दरअसल, अक्टूबर 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान की जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी. इन्‍हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था. 

हाईकोर्ट ने मोहम्मद आजम खान की भी जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी, किन्तु इन्‍हें शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना का बयान दर्ज होने के बाद रिहा करने का आदेश दिया. कोर्ट ने अलीगढ़ कोर्ट खुलने पर तीन माह के भीतर शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने की अपेक्षा की है. यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने डा तंजीन फातिमा ,मोहम्मद आजम खान व मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां की जमानत अर्जियों को निस्तारित करते हुए दिया. 

याचियों के खिलाफ बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने रामपुर के गंज थाने में धोखाधड़ी, कूटकरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करायी है, जिसमें पुलिस चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. मुकदमा चल रहा है. 

आजम खान व तंजीन फातिमा पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे की दो जन्मतिथि प्रमाणपत्र बनवाया है. एक नगर पालिका परिषद रामपुर व दूसरी नगर निगम लखनऊ से बनवाया है. दोनों जन्म तिथि में काफी अंतर है. अब्दुल्ला आजम खान पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का फायदा उठाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का आरोप है. हाईकोर्ट ने इनका चुनाव निरस्त कर दिया है. 

अब्दुल्ला आजम खान का कहना था कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने मे उनकी कोई भूमिका नहीं है. इसलिए जमानत पर रिहा किया जाए. तंजीन फातिमा का कहना था कि महिला होने के कारण जमानत दी जाए. इसलिए दोनों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया. परन्तु आजम खान को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने के बाद रिहा करने का आदेश दिया गया था.


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