
लखनऊ:
इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) ने बुधवार को केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुई खुर्शीद द्वारा चलाए जा रहे जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के कामकाज में वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया जिसे लुई ने खारिज कर दिया है।
आईएसी के सदस्य संजय सिंह ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केन्द्रीय समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शारीरिक रूप से बाधित लोगों के कल्याण के लिए ट्रस्ट को दिए गए अनुदान में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
सिंह ने आरोप लगाया कि विकलांग लोगों को मदद देने के बजाय फर्जी शिविर लगाकर एवं अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करके धन का गबन किया गया।
दिल्ली में जारी एक बयान में लुई खुर्शीद ने कहा कि आरोपों को ‘‘कोई दम नहीं है तथा वे दुर्भावनापूर्ण और आधारहीन’’ हैं। लुई ट्रस्ट की परियोजना निदेशक हैं। उन्होंने एक समाचार चैनल में लगाए गए इसी तरह के आरोपों के जवाब में यह बात कही।
सिंह ने आरोप लगाया कि विकलांगो को उपकरण वितरण के लिए कथित रुप से लगाए गए शिविरो के बारे में छानबीन करने पर पता चला कि इटावा के मुख्य चिकित्साधिकारी की तरफ से फर्जी हस्ताक्षर बनाये गये थे और मैनपुरी के विकलांग कल्याण अधिकारी तपस्वी लाल को तो इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि शिविर लगाने के बारे में उनके हस्ताक्षर से एक पत्र दिल्ली तक पहुंच चुका है।
एक बयान में लुई ने कहा, ‘‘यह अप्रासंगिक एवं विचित्र है क्योंकि ट्रस्ट ने कोई ऐसा दस्तावेज किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपा, जिसमें उसने दावा किया या जिस पर हस्ताक्षर हो या जिस पर किसी तपस्वी लाल के हस्ताक्षर बताए गए हों।’’
आईएसी के सदस्य संजय सिंह ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केन्द्रीय समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शारीरिक रूप से बाधित लोगों के कल्याण के लिए ट्रस्ट को दिए गए अनुदान में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
सिंह ने आरोप लगाया कि विकलांग लोगों को मदद देने के बजाय फर्जी शिविर लगाकर एवं अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करके धन का गबन किया गया।
दिल्ली में जारी एक बयान में लुई खुर्शीद ने कहा कि आरोपों को ‘‘कोई दम नहीं है तथा वे दुर्भावनापूर्ण और आधारहीन’’ हैं। लुई ट्रस्ट की परियोजना निदेशक हैं। उन्होंने एक समाचार चैनल में लगाए गए इसी तरह के आरोपों के जवाब में यह बात कही।
सिंह ने आरोप लगाया कि विकलांगो को उपकरण वितरण के लिए कथित रुप से लगाए गए शिविरो के बारे में छानबीन करने पर पता चला कि इटावा के मुख्य चिकित्साधिकारी की तरफ से फर्जी हस्ताक्षर बनाये गये थे और मैनपुरी के विकलांग कल्याण अधिकारी तपस्वी लाल को तो इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि शिविर लगाने के बारे में उनके हस्ताक्षर से एक पत्र दिल्ली तक पहुंच चुका है।
एक बयान में लुई ने कहा, ‘‘यह अप्रासंगिक एवं विचित्र है क्योंकि ट्रस्ट ने कोई ऐसा दस्तावेज किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपा, जिसमें उसने दावा किया या जिस पर हस्ताक्षर हो या जिस पर किसी तपस्वी लाल के हस्ताक्षर बताए गए हों।’’
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