बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की घोषणा के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ आदित्य ठाकरे.
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना ने एक बार फिर हाथ मिलाकर गठबंधन (BJP- Shivsena alliance) को बरकरार रखा, जबकि इस गठबंधन के भविष्य को लेकर लंबे अर्से से संशय की स्थिति थी. इस गठबंधन के साथ महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने के कयास लगाए जा रहे हैं.
चर्चा है कि शिवसेना (Shivsena) के 'राजकुमार' आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) अब चुनाव मैदान में नजर आ सकते हैं और निकट भविष्य में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में भी नजर सकते हैं.
सोमवार को बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन की घोषणा के बाद हर तरफ शिवसेना के अचानक से पलट जाने की चर्चा है. साथ में एक और चर्चा चल रही है कि क्या शिवसेना मुख्यमंत्री के तौर पर आदित्य ठाकरे को देखना चाहती है?
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बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की घोषणा के मौके पर मंच पर शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे की मौजूदगी के क्या मायने हैं? क्या आदित्य को शिवसेना की तरफ से अगले मुख्यमंत्री के तौर प्रचारित करने की तैयारी है? चर्चा यह भी है कि आदित्य ठाकरे माहिम से विधानसभा चुनाव भी लड़ने वाले हैं. शिवसेना तो इस मामले पर चुप है लेकिन विरोधी भी अभी इस सवाल का जवाब हंसकर टालना ही बेहतर मान रहे हैं.
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हालांकि ठाकरे परिवार के किसी सदस्य ने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है और सरकार में भी शामिल नहीं हुआ है. बाल ठाकरे की तरह ही उद्धव ठाकरे ने भी सरकार से बाहर रहकर रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में रखने का काम ही किया है. लेकिन आदित्य भी वैसा ही करेंगे, यह जरूरी नहीं है. कहा यह भी जा रहा है कि आदित्य ठाकरे की मां रश्मि ठाकरे भी बेटे को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती हैं.
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वैसे ज्यादातर लोगों का मानना है कि अभी ये सिर्फ कयास है, इसमें सच्चाई कम है, लेकिन यह भी सच है राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता है.
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