नई दिल्ली:
अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को प्रोन्नति के दौरान आरक्षण के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक को लेकर संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार को कई बार बाधित हुई लेकिन अंतत: राज्यसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया।
संविधान (में 117वां संशोधन) विधेयक, 2012 पर दो दिनों तक चली बहस के बाद विधेयक के पक्ष में 206 सदस्यों ने वोट दिया तथा 10 ने इसके खिलाफ वोट दिया।
यह विधेयक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की एक प्रमुख मांग रही है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) इसका विरोध करती रही है।
बहस के दौरान सपा सदस्य राम गोपाल यादव ने कहा कि प्रोन्नति में परिस्थितिजन्य वरिष्ठता गलत है और लोगों में इससे द्वेष पैदा होगी।
यादव ने सच्चर समिति की रिपोर्ट लागू करने की भी मांग उठाई, जो मुसलमानों के लिए आरक्षण की सिफारिश करती है।
राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने उनसे यह मामला शून्यकाल में उठाने और प्रश्नकाल चलने देने के लिए कहा। लेकिन सपा सदस्य नरेश अग्रवाल ने अपने सदस्यों से सभापति के आसन के पास एकत्र होने का आह्वान किया, जिसके बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि सरकार को अनुच्छेद 335 से सम्बंधित विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह अनुच्छेद प्रशासन में दक्षता से निपटता है।
यह विधेयक नौकरियों और प्रोन्नति के लिए एससी व एसटी के दावों से प्रशासनित दक्षता शब्द को असम्बद्ध करता है।
विधेयक को चार सितम्बर को राज्यसभा में पेश किया गया था। विधेयक में कम से कम संविधान के चार अनुच्छेदों को संशोधित करने की मांग है, ताकि सरकार को यह अधिकार मिल सके कि वह एससी और एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण मुहैया करा सके।
दूसरी ओर इस विधेयक के विरोध तथा अल्पसंख्यकों पर सच्चर समिति की रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर सपा सदस्यों ने लोकसभा की कार्यवाही पांच बार बाधित की।
लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह जैसे ही शुरू हुई, पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा ने सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति का मुद्दा उठाया। सपा सदस्य लोकसभा अध्यक्ष के आसन के समक्ष खड़े होकर विधेयक के खिलाफ नारेबाजी करने लगे, जिससे प्रश्नकाल बाधित हुआ।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सपा सदस्यों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें शून्यकाल में मुद्दा उठाने का समय दिया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने भी सपा सदस्यों से शांत होने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पहले 11.30 बजे तक और फिर दोपहर तक स्थगित कर दी। उसके बाद सदन की कार्यवाही तीन बजे तक और फिर दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
ज्ञात हो कि एक तरफ बसपा इस विधेयक को पारित करने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है, वहीं दूसरी ओर सपा ने धमकी दी है कि यदि विधेयक पारित हुआ तो वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को अपने समर्थन पर पुनर्विचार करेगी।
इस मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से ही बार-बार बाधित हो रही है। शीतकालीन सत्र 22 नवम्बर से शुरू हुआ था।
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में इस विधेयक के खिलाफ लगभग 18 लाख सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने भाजपा, बसपा और कांग्रेस के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहने से सरकारी कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह बाधित रहा। कुछ विभागों में दोनों गुटों के बीच टकराव की भी स्थिति पैदा हुई, लेकिन बीचबचाव कर मामले को शांत करा लिया गया।
सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के बैनर तले सरकारी कर्मचारियों ने सोमवार को राजधानी लखनऊ सहित सूबे के लगभग सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों ने राजधानी लखनऊ में बसपा कार्यालय के बाहर मायावती का पुतला फूंकने की कोशिश की। वहीं कांग्रेस कार्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने तोड़फोड़ की और सोनिया गांधी तथा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ नारेबाजी की। भाजपा कार्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
संविधान (में 117वां संशोधन) विधेयक, 2012 पर दो दिनों तक चली बहस के बाद विधेयक के पक्ष में 206 सदस्यों ने वोट दिया तथा 10 ने इसके खिलाफ वोट दिया।
यह विधेयक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की एक प्रमुख मांग रही है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) इसका विरोध करती रही है।
बहस के दौरान सपा सदस्य राम गोपाल यादव ने कहा कि प्रोन्नति में परिस्थितिजन्य वरिष्ठता गलत है और लोगों में इससे द्वेष पैदा होगी।
यादव ने सच्चर समिति की रिपोर्ट लागू करने की भी मांग उठाई, जो मुसलमानों के लिए आरक्षण की सिफारिश करती है।
राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने उनसे यह मामला शून्यकाल में उठाने और प्रश्नकाल चलने देने के लिए कहा। लेकिन सपा सदस्य नरेश अग्रवाल ने अपने सदस्यों से सभापति के आसन के पास एकत्र होने का आह्वान किया, जिसके बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि सरकार को अनुच्छेद 335 से सम्बंधित विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह अनुच्छेद प्रशासन में दक्षता से निपटता है।
यह विधेयक नौकरियों और प्रोन्नति के लिए एससी व एसटी के दावों से प्रशासनित दक्षता शब्द को असम्बद्ध करता है।
विधेयक को चार सितम्बर को राज्यसभा में पेश किया गया था। विधेयक में कम से कम संविधान के चार अनुच्छेदों को संशोधित करने की मांग है, ताकि सरकार को यह अधिकार मिल सके कि वह एससी और एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण मुहैया करा सके।
दूसरी ओर इस विधेयक के विरोध तथा अल्पसंख्यकों पर सच्चर समिति की रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर सपा सदस्यों ने लोकसभा की कार्यवाही पांच बार बाधित की।
लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह जैसे ही शुरू हुई, पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा ने सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति का मुद्दा उठाया। सपा सदस्य लोकसभा अध्यक्ष के आसन के समक्ष खड़े होकर विधेयक के खिलाफ नारेबाजी करने लगे, जिससे प्रश्नकाल बाधित हुआ।
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सपा सदस्यों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें शून्यकाल में मुद्दा उठाने का समय दिया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने भी सपा सदस्यों से शांत होने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पहले 11.30 बजे तक और फिर दोपहर तक स्थगित कर दी। उसके बाद सदन की कार्यवाही तीन बजे तक और फिर दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
ज्ञात हो कि एक तरफ बसपा इस विधेयक को पारित करने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है, वहीं दूसरी ओर सपा ने धमकी दी है कि यदि विधेयक पारित हुआ तो वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को अपने समर्थन पर पुनर्विचार करेगी।
इस मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से ही बार-बार बाधित हो रही है। शीतकालीन सत्र 22 नवम्बर से शुरू हुआ था।
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में इस विधेयक के खिलाफ लगभग 18 लाख सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने भाजपा, बसपा और कांग्रेस के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहने से सरकारी कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह बाधित रहा। कुछ विभागों में दोनों गुटों के बीच टकराव की भी स्थिति पैदा हुई, लेकिन बीचबचाव कर मामले को शांत करा लिया गया।
सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के बैनर तले सरकारी कर्मचारियों ने सोमवार को राजधानी लखनऊ सहित सूबे के लगभग सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों ने राजधानी लखनऊ में बसपा कार्यालय के बाहर मायावती का पुतला फूंकने की कोशिश की। वहीं कांग्रेस कार्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने तोड़फोड़ की और सोनिया गांधी तथा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ नारेबाजी की। भाजपा कार्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
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