Tripura में सीएम बिप्लब देब के खिलाफ बगावत, नाराज विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाला

त्रिपुरा (Tripura) में मुख्यमंत्री बिप्लब देब के खिलाफ पार्टी में बगावत हो गई है. बागी विधायक मुख्यमंत्री को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली पहुंच गए हैं. बागी विधायकों की अगुवाई राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और पार्टी के कद्दावर सुदीप रॉय बर्मन कर रहे हैं.

Tripura में सीएम बिप्लब देब के खिलाफ बगावत, नाराज विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाला

त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बिप्लब देब के खिलाफ बढ़ा बागी विधायकों का असंतोष। (फाइल फोटो)

खास बातें

  • त्रिपुरा में करीब एक दर्जन विधायकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला
  • राज्य में भाजपा के 36 विधायक, सहयोगी दल आईपीएफटी के आठ विधायक
  • बिप्लब देब ने 2018 में वाम दलों का 25 वर्ष का शासन खत्म किया था
गुवाहाटी:

त्रिपुरा (Tripura) में मुख्यमंत्री बिप्लब देब के खिलाफ पार्टी में बगावत हो गई है. बागी विधायक मुख्यमंत्री (Tripura Chief Minister) को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली पहुंच गए हैं. बागी विधायकों की अगुवाई राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और पार्टी के कद्दावर सुदीप रॉय बर्मन कर रहे हैं. बर्मन के नेतृत्व में करीब एक दर्जन विधायकों के समूह ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात का वक्त मांगा है.  

बगावत पर उतरे विधायकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अपने हल्के बयानों से पार्टी की छवि खराब की है. ये विधायक बिप्लब देब पर कमजोर नेतृत्व और कुशासन का आरोप लगा रहे हैं. बागी गुट में शामिल एक विधायक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनका धड़ा गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने की कोशिश कर रहा है. विधायकों का यह धड़ा नई दिल्ली के त्रिपुरा भवन में ठहरा है. विधायक ने कहा कि हम मुख्यमंत्री के तानाशाही रवैये की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को देना चाहते हैं.

बिप्लब पद पर रहे तो विपक्ष मजबूत होगा
बागी विधायकों का कहना है कि सभी विधायक पार्टी के साथ हैं और चाहते हैं कि दूसरी बार भी राज्य में भाजपा की ही सरकार बने, लेकिन मौजूदा नेतृत्व रहेगा तो त्रिपुरा में कांग्रेस और वाम दलों को ही मजबूती मिलेगी. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के सतही बयान पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

कोरोना का खराब प्रबंधन का आरोप 
बागी गुट का कहना है कि राज्य में कोरोना पर काबू पाने के इंतजाम बेहद खराब हैं. यही कारण है कि केंद्र की एक टीम को त्रिपुरा भेजना पड़ा. महामारी के दौर में भी राज्य में कोई अलग स्वास्थ्य मंत्री नहीं हैं. अनुभवी आईएएस और आईपीएस डेपुटेशन या वीआरएस लेकर राज्य छोड़ रहे हैं. वे मुख्यमंत्री की तानाशाही कार्यशैली को सहने में सक्षम नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने यहां तक की मीडिया को भी धमकाया, जिस कारण पत्रकारों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.


मुख्यमंत्री के करीबी ने कहा, बगावत ज्यादा गंभीर नहीं 
हालांकि मुख्यमंत्री बिप्लब देब के एक निकट सहयोगी ने बताया कि बगावत उतनी नहीं है, जितना बताया जा रहा है. ऐसे सात-आठ विधायक हैं, जो राज्य में सरकार के साफ-सुथरे कामकाज में गड़बड़ी पैदा करना चाहते हैं. इनमें से ज्यादातर कांग्रेस से आए लोग हैं. जबकि पार्टी के पुराने सहयोगी और नेता मुख्यमंत्री देब के नेतृत्व में भरोसा जता चुके हैं.

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2018 में प्रचंड बहुमत पाया था
भाजपा और उसके सहयोगी आईपीएफटी ने 2018 में त्रिपुरा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. बीजेपी ने राज्य से 25 साल पुराने वाम शासन को उखाड़ फेंका था. 60 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी के 36 और आईपीएफटी के आठ विधायक हैं.