राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू को रोजाना एक बार जोधपुर केंद्रीय जेल से बाहर का खाना मंगाने की मंगलवार को इजाजत दे दी. आसाराम बापू एक नाबालिग लड़की से यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. हालांकि, अदालत ने कहा कि बाहर से लाए गए खाने को आसाराम को देने के पहले जेल अधिकारी इसकी पूरी जांच कर लेंगे.
अदालत ने आसाराम को एक हलफनामा भी दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें उसे बताना होगा कि निजी तौर पर मंगाए गए खाने से उसके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर पड़ता है तो वह उसकी जिम्मेदारी लेगा. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जो भी व्यक्ति आसाराम के लिए खाना लाएगा, वो अपनी पूरी जानकारी और पहचान पत्र दस्तावेजों सहित एक हलफनामा देगा.
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बता दें कि आसाराम बापू ने अदालत में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि बुजुर्ग होने और मेडिकल कंडीशन के कारण उसे जेल के बाहर से ऐसा खाना मंगाने की अनुमति दी जाए जो उसके स्वास्थ्य के लिए अनुकूल हो. उसके वकील जे एस चौधरी ने दलील दी थी कि जेल में दिया जाने वाला भोजन उसके अनुकूल नहीं है और इससे उसके स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है.
वकील ने बताया कि 'हमने यह दलील भी रखी कि मामले में ट्रायल के दौरान, उन्हें निजी स्रोतों से खाना खाने की अनुमति दी गई थी, ऐसे में सुरक्षा कदमों के लिहाज से उन्हें राजस्थान जेल नियम, 1951 के तहत वही छूट दी जाए.' आसाराम के पक्ष से एक सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल से जारी की गई एक पर्ची भी लगाई गई थी, जिसमें उसकी उम्र को 83 साल बताया गया है.
अस्ताल के प्रिस्क्रिप्शन पर जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस प्रभा शर्मा ने कहा कि 'डॉक्टर की ओर से बताई गई खाने की चीजों को देखकर यह साफ है कि जेल प्रशासन के लिए यह रोज उपलब्ध करा पाना संभव नहीं होगा, ऐसे में अदालत इस नई व्यवस्था से संतुष्ट है.' आसाराम को पहले दी गई छूट का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि उसी आधार पर इस बार भी दोषी को निजी स्रोत से हर रोज एक बार खाना मंगाने की छूट दी जा सकती है.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं