नई दिल्ली:
कोयला खदानों के आवंटन मुद्दे पर एनडीटीवी के पास प्रधानमंत्री कार्यालय का 25 जुलाई 2005 का वह नोट है जिसमें यह कहा गया है कि जब तक नीलामी से कोयला खदानों को देने की प्रक्रिया अमल में नहीं आती है तब तक स्क्रीनिंग कमेटी के ज़रिए ही कोयला खदानों का आवंटन किया जाए।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी बैठक में कोयला मंत्रालय ने कहा था कि कोयला खदानें नीलामी के ज़रिए दी जानी चाहिए लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय का यह मानना था कि चूंकि इसके लिए कानून बदलने में लंबा वक्त लगेगा तब तक स्क्रीनिंग कमेटी के ज़रिए ही खदानें दी जाएं।
प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कोयला मंत्रालय ने कहा कि कोयला खदानें नीलामी के जरिये दी जाएं लेकिन बैठक में राज्य सरकारों के नुमाइंदों ने नीलामी का विरोध किया।
बैठक में कानून बदलने तक स्क्रीनिंग कमेटी के ज़रिए खदानें दिए जाने का फैसला हुआ।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी बैठक में कोयला मंत्रालय ने कहा था कि कोयला खदानें नीलामी के ज़रिए दी जानी चाहिए लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय का यह मानना था कि चूंकि इसके लिए कानून बदलने में लंबा वक्त लगेगा तब तक स्क्रीनिंग कमेटी के ज़रिए ही खदानें दी जाएं।
प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कोयला मंत्रालय ने कहा कि कोयला खदानें नीलामी के जरिये दी जाएं लेकिन बैठक में राज्य सरकारों के नुमाइंदों ने नीलामी का विरोध किया।
बैठक में कानून बदलने तक स्क्रीनिंग कमेटी के ज़रिए खदानें दिए जाने का फैसला हुआ।
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