
मुस्लिमों और ईसाइयों के धर्म परिवर्तन को लेकर संसद में मचे हंगामे के बाद बीजेपी के कई शीर्ष नेताओं ने आज राष्ट्रीय स्वयंशेवक संघ (आरएसएस) नेताओं से मुलाकात की। खबर है कि इस बैठक में विवादास्पद बयान से बचने को लेकर सहमति बनी, जिससे कि आर्थिक सुधार के पीएम मोदी के एजेंडे से ध्यान ना भटकने पाए।
सरकार के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के निवास पर यह बैठक बुलायी गई, जिसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और संघ के दूसरे बड़े कद्दावर नेता भैय्याजी जोशी के अलावा केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज ने शिरकत की।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में नेताओं ने मौजूदा राजनीतिक हालात और देशभर में जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर सरकार और बीजेपी पर विपक्ष के हमलों से पैदा प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।
शीर्ष नेताओं के बीच यह विचार विमर्श ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण पंथी हिंदू संगठन धर्म परिवर्तन को आगे बढ़ा रहे हैं और उनके शीर्ष नेता इसे 'घर वापसी' की संज्ञा दे रहे हैं।
पार्टी नेताओं ने रात में हुई बैठक में उठे मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी है, लेकिन भाजपा सूत्रों ने बताया कि यह एक आवधिक समीक्षा बैठक थी जिसमें भाजपा नेताओं, उसके वैचारिक संघ आरएसएस और सरकार ने एक साथ बैठकर राजनीतिक स्थिति तथा पार्टी के साथ सुचारू समन्वय सुनिश्चित करने के लिए अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श किया।
सूत्रों ने कहा कि बीजेपी और संघ दोनों में धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर एक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पर सहमति बनी है।
उन्होंने 'पोल-खोल' नाम से एक दूसरा अभियान चलाने का फैसला भी लिया, जिसमें शीतकालीन सत्र में विपक्ष द्वारा अटकाए गए विधेयकों के फायदों को रेखांकित किया जाएगा। (एजेंसी इनपुुट के साथ)
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