
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अपने नक्सल विरोधी अभियान को रोककर बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से बात करनी चाहिए!
जहां केंद्र ने अलग-अलग राज्यों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में हजारों की संख्या में अर्धसैनिक बलों और अधिकारियों को लगा रखा है, वहीं बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी इस अभियान की हवा निकालते हुए नक्सलियों की तारीफ में ऐसी बातें करते और कहते हैं, जिससे शायद उन्हें परहेज करना चाहिए।
मांझी ने बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों को अपने भाई और बेटे जैसा बताते हुए अधिकारियों और ठेकेदारो पर गलत एस्टीमेट बनाने का आरोप लगाया।
मांझी ने नक्सल प्रभावित मदनपुर प्रखंड में कहा कि नक्सली उनके भाई और बेटे जैसे हैं... उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे नक्सली बन गए। इनमें से कुछ बाहरी हैं, लेकिन अधिकतर स्थानीय लोग ही हैं।
मुख्यमंत्री ने नक्सलियों का बचाव करते हुए कहा कि ठेकेदारों से लेवी लेना रंगदारी नहीं है... जो काम 15 हजार रुपये में हो सकता हैं, उससे दोगुनी राशि सरकार से ली जाती है। अगर नक्सली ठेकेदारों से लेवी लेते हैं, तो इसमें हर्ज़ क्या है।
मांझी के इस बयान से इलाकों में काम करने वाले अधिकारी और ठेकेदारों पर उल्टा असर पड़ेगा। यही नहीं, आने वाले दिनों में नक्सलियों के लेवी की मांग में अगर बढ़ोतरी हो जाए, तो यह भी कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
इस बीच, राज्य के कई मंत्रियों ने अब मुख्यमंत्री मांझी से मिलकर ऐसे बयानों से परहेज करने का अनुरोध करने का निर्णय किया है। लेकिन सब जानते हैं कि जब मांझी आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव के सुझावों को अनसुना करने का मन बना चुके हैं, तो वह अपने मंत्री की भला क्या सुनेंगे।
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