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This Article is From Sep 21, 2015

भ्रष्टाचार का अड्डा हैं नगर निगम : दिल्ली की सीबीआई कोर्ट

भ्रष्टाचार का अड्डा हैं नगर निगम : दिल्ली की सीबीआई कोर्ट
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने नगर निगम के एक निलंबित अधिकारी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में दो साल की सजा सुनाई और कहा कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं और भ्रष्ट लोगों को रोकने के लिए मजबूत कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में जूनियर इंजीनियर दीनानाथ अग्रवाल को सजा सुनाई। अदालत ने टिप्पणी की कि यह आम जानकारी है कि नगर निगमों के निचले अधिकारियों ने भी लाखों रुपये की संपत्ति जमा कर ली है।

दोषी ठहराया गया भ्रष्टाचारी अधिकारी
दीनानाथ को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दोषी ठहराया गया। अदालत ने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार कैंसर के समान है जो चुपचाप बढ़ता रहता है लेकिन अंतत: मानव शरीर को समाप्त कर देता है...। नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा हो गए हैं और अगर अंकुश नहीं लगाया गया तो काफी तेजी से फैल सकता है। कोई भी आम नागरिक जिसका उनसे वास्ता पड़ा है, वे जानते हैं कि किस प्रकार वे आम लोगों से पैसे लेते हैं। कोई नहीं बच पाता।’’

टूटने लगी आम आदमी की उम्मीद
अदालत ने कहा कि आम लोगों की उम्मीद टूटने लगी है। इस उम्मीद को टूटने नहीं दिया जा सकता। नगर निगमों को भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए कदम उठाना चाहिए।

अदालत ने दीनानाथ पर 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और उसे एक महीने की जमानत दे दी ताकि वह इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकें। सीबीआई ने 2001 में एक मामला दर्ज कर आरोप लगाया था कि दीनानाथ ने 12 साल की नौकरी में अवैध तरीके से 27 लाख रुपये की संपत्ति अर्जित की।

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