
नई दिल्ली:
केंद्रीय विधि मंत्रालय की वेबसाइट उच्चतर न्यायपालिका में न्यायाधीशों की न्यायाधीशों के द्वारा नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली में सुधार पर सुझावों से भर गई है। वेबसाइट पर तकरीबन 3500 ज्ञापन पोस्ट किए जा चुके हैं। यह जानकारी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को दी गई।
सॉलीसीटर जनरल (एसजी) रंजीत कुमार ने अदालत से कहा कि मंत्रालय की वेबसाइट पर नोटिस के मद्देनजर 3500 ज्ञापन आए हैं जिसमें पुन:बहाल कॉलेजियम व्यवस्था में सुधार पर राय मांगी गई थी।
जिन लोगों ने सुझाव दिए हैं उनमें भाजपा के पूर्व विचारक के एन गोविंदाचार्य भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में एक शर्त यह होनी चाहिए कि अगर कोई संभावित न्यायाधीश अपनी शिक्षा और अन्य बातों के बारे में गलत सूचना देता है तो उसे महाभियोग की कार्यवाही की जटिलताओं में पड़े बिना हटाया जा सकता है।
शीर्ष अदालत समाज के विभिन्न हिस्से के लोगों के सुझावों पर कल सुनवाई शुरू करेगी कि कैसे कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सकती है और जवाबदेही में सुधार लाया जा सकता है।
सॉलीसीटर जनरल (एसजी) रंजीत कुमार ने अदालत से कहा कि मंत्रालय की वेबसाइट पर नोटिस के मद्देनजर 3500 ज्ञापन आए हैं जिसमें पुन:बहाल कॉलेजियम व्यवस्था में सुधार पर राय मांगी गई थी।
जिन लोगों ने सुझाव दिए हैं उनमें भाजपा के पूर्व विचारक के एन गोविंदाचार्य भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में एक शर्त यह होनी चाहिए कि अगर कोई संभावित न्यायाधीश अपनी शिक्षा और अन्य बातों के बारे में गलत सूचना देता है तो उसे महाभियोग की कार्यवाही की जटिलताओं में पड़े बिना हटाया जा सकता है।
शीर्ष अदालत समाज के विभिन्न हिस्से के लोगों के सुझावों पर कल सुनवाई शुरू करेगी कि कैसे कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सकती है और जवाबदेही में सुधार लाया जा सकता है।
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