भीड़ हिंसा का विरोध करते लोगों की फाइल तस्वीर
- भीड़ हिंसा के मुद्दे को विपक्ष ने राज्यसभा में उठाया
- सरकार की ओर से गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने दिया जवाब
- कहा, भीड़ हिंसा पर कोई अलग कानून लाने पर विचार नहीं कर रही है
नई दिल्ली:
सरकार भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या करने की घटनाओं से निपटने के लिए कोई अलग कानून लाने पर विचार नहीं कर रही है. गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने बुधवार को यह बात कही. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक प्रश्न का जवाब देते हुए अहीर ने कहा कि पीट पीटकर जान किसी एक व्यक्ति द्वारा ली जाए या कई व्यक्तियों द्वारा, वर्तमान कानून उससे निपट सकते हैं. अहीर ने कहा, "राज्य सरकारें वर्तमान कानूनों के तहत ऐसी घटनाओं में शामिल व्यक्ति या लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं. मुझे नहीं लगता कि इसके लिए किसी अलग कानून की जरूरत है."
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अहीर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के एक पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे. सिंह ने पूछा था कि क्या केंद्र सरकार गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा हत्या से निपटने के लिए सीआरपीसी और आईपीसी में बदलाव करने पर विचार कर रही है.
इस पर अहीर ने कहा कि यह राज्य का मामला है. उन्होंने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही सभी राज्यों को गोरक्षा के नाम पर हिंसा से जुड़े ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई करने और दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का दिशा निर्देश जारी किया है.
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सपा नेता नरेश अग्रवाल, जिन्होंने गोरक्षकों की हिंसा पर मूल प्रश्न पूछा था, उन्होंने 'भाजपा के लोगों' पर ऐसी घटनाओं में शामिल होने का आरोप लगाया. अहीर ने इस मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं का संदर्भ देने पर आपत्ति जताई.
पश्चिम बंगाल में भीड़ के बाद के हालात का वीडियो
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सपा के सभी सांसद सभापति के आसन के पास जाकर नारेबाजी करने लगे.
वे कह रहे थे, "गो रक्षा के नाम पर हत्या, नहीं चलेगी." इस दौरान विपक्षी सदस्य अपनी सीट पर खड़े हो गए.
सभापति हामिद अंसारी ने शोर-शराबे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी.
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इस पर अहीर ने कहा कि यह राज्य का मामला है. उन्होंने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही सभी राज्यों को गोरक्षा के नाम पर हिंसा से जुड़े ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई करने और दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का दिशा निर्देश जारी किया है.
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